v . Shantaram biography in hindi
v . Shantaram biography in hindi

v . Shantaram biography in hindi : wife,awards,children family tree, movies ,वी . शान्ताराम का जीवन परिचय, वी . शान्ताराम का जीवनी,वी . शान्ताराम निबंध

वी . शान्ताराम का जीवन परिचय

v . Shantaram biography in hindi : इतिहास कभी विराम नहीं लेता , व्यक्ति आते – जाते रहते हैं , किन्तु इतिहास की कसौटी पर वही खरा उतरता है जो अपने पुरुषार्थ , समर्पण एवं अटूट – निष्ठा से किसी भी क्षेत्र में सक्रिय रहकर राष्ट्र की सेवा करता है । इतिहास का रथ वह हाँकता है जो सोचता है और सोचे हुए को करता भी है । अपने सिने चिन्तन को साकार करने वाले सिने जगत् के ऐसे हो देदीप्यमान नक्षत्र थे – वानकद्रे शान्ताराम ।

v . Shantaram biography in hindi : भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण बनाने एवं उसके माध्यम से राष्ट्रीय विकास का स्वप्न देखने वालों में उनका नाम अग्रणी है । उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से प्रकृति के समस्त भावों को उद्दीप्त करने का जीवन पर्यन्त प्रयास किया । उनकी फिल्मों में आततायियों के विरुद्ध कहीं क्रोधपूर्ण भयंकर गर्जना ,

साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कहीं सात्विक प्रेम का उच्छवास , दलितों के उद्धार के लिए कहीं शोक और परितापजनित हृदयविदारी करुणा निस्वन , देशभक्ति की भावना भरने हेतु कही वीरता व गर्व से भरा हुआ सिंहनाद तथा भगवद् आराधना हेतु कहीं भक्ति के उन्मेष से चित्त की द्रवता आदि नाना प्रकार के प्राकृतिक भावों का उद्गार देखा जाता है ।

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नामवी . शान्ताराम
जन्म18 नवम्बर , 1901
जन्म स्थानमहाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में
मृत्यु28 अक्टूबर , 1990 को 89 वर्ष
माता-पिता कमलाबाई – राजाराम वंकुद्रे
कार्यनिर्देशक, अभिनेत्र
सम्मानदादा साहब फाल्के पुरस्कार, पदमश्री
पुत्रकिरण ,प्रभात कुमार
पत्नीसँध्या ,जयश्री ,वेमला शांताराम
कार्यकाल 1921–1987
पुत्रियाराजश्री,मधुरा पंडित ,चर्णशीला राय, सरोजिनी,तेजसाश्री शांताराम
निर्माण 82 फिल्मों
निर्देशन 55 फिल्मों
v . Shantaram biography in hindi

वी . शान्ताराम का जन्म, शिक्षा, आरंभि कार्य और फिल्मों में प्रवेश

v . Shantaram biography in hindi : वह फिल्म को केवल मनोरंजन का साधन मानने वालों को दो टूक जवाब देते थे । उनके अनुसार , फिल्म राष्ट्रीय सांस्कृतिक मूल्यों की बहुमूल्य थाती को सुरक्षित रखने एवं सांस्कृतिक एकता के माध्यम राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को रक्षित करने में अहम् भूमिका अदा करती हैं । फिल्म जगत की ऐसी उस महान् विभूति का धरा पर पदार्पण 18 नवम्बर , 1901 ई महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में हुआ था ।

v . Shantaram biography : बाल्यकाल से ही अध्ययन में उनका मन न लग अतएव अध्ययन छोड़कर तत्कालीन सुप्रसिद्ध गायक बाल गन्धर्व द्वारा संचालित गन्धर्व नाटक मण्डली में 13 वर्ष की अवस्था में शामिल हो गए । इस नाटक मण्डली में अपनी जीवन यात्रा  निर्माता बने । यहाँ वह पर्दा उठाने – गिराने के साथ ही लड़की की वेशभूषा में राजाओं एवं की शुरूआत पर्दा उठाने और गिराने से करके वह अन्ततोगत्वा अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति के फिल्म रानियों की परिचारिका के रूप में भी कार्य करते थे ।

v . Shantaram biography : लगभग 6 वर्ष तक इस नाटक मण्डली में कार्य करने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र फिल्म कम्पनी में प्रवेश पा लिया । इसके बारे में उन्होंने अपनी आत्मकथा में एक जगह लिखा है कि ” मैं ड्रामा कम्पनी के काम से ऊब गया और एक दिन इसे छोड़कर भाग गया । ” उस समय उनके कुछ रिश्तेदार भालजी पेंढर , बाबूराव पेंढर आदि फिल्मों में काम करते थे ।

v . Shantaram biography : बाबूराव पेंढर , तो महाराष्ट्र फिल्म कम्पनी में मैनेजर और अभिनेता के रूप में कार्य करते थे । उन्हीं के सहयोग से 20 जून , 1920 को शान्ताराम को इस कम्पनी में कार्य करने का अवसर मिला । यहाँ भी वह प्रारम्भ में स्टूडियो का सामान इधर – उधर ले जाने तथा कुछ अन्य छोटे – मोटे कार्य करते रहे । इसके साथ ही उन्होंने कुली से लेकर कारपेन्टर , एडीटर और एक्टर तक के काम किए ।

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वी . शान्ताराम का पहली फिल्म

1923 ई . में ‘ माया बाजार ‘ और ‘ सिंहगढ़ ‘ फिल्मों में उन्होंने छोटी भूमिकाएँ की और 1925 ई . में बाबूराव पेंढर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘ साहूकारी पाश ‘ में सर्वप्रथम नायक के रूप में कार्य किया । यह देश की आरम्भिक यथार्थवादी फिल्मों में महत्वपूर्ण थी । बाबूराव पेंढर उनके सिनेमा गुरु थे जिनकी प्रेरणा से पालकर ‘ थी । उन्होंने सिनेमा जगत् की बुलन्दियों का स्पर्श किया ।

उनके द्वारा निर्देशित प्रथम फिल्म ‘ नेताजी महाराष्ट्र फिल्म कम्पनी से अनुभव प्राप्त कर उन्होंने सीताराम कुलकर्णी , केशवराव देवर , वी दामले , शेख फतेहलाल आदि सहयोगियों के साथ प्रभात फिल्म कम्पनी शुरू की। इस कम्पनी के माध्यम से उन्होंने पहले कुछ मूक और फिर बोलती हुई फिल्में बनाई। प्रभात के बैनर तले उनकी पहली फिल्म ‘ गोपाल कृष्ण ‘ थी । इसके बाद ‘ रानी साहिवा ’ व ‘ खूनी खंजर ‘ बनाई गई ।

ये सभी मूक फिल्में थीं । इस कम्पनी की पहली बोलती फिल्म 1932 में बनी ‘ अयोध्या का राजा ‘ थी । यह फिल्म भारत की पहली बोलती फिल्म ‘ आलमआरा ‘ के तुरन्त बाद ही बनाई गई थी । यह हिन्दी और मराठी दोनों ही भाषाओं में बनी , जिसकी नायिका तत्कालीन सुप्रसिद्ध अभिनेत्री दुर्गा खोटे और निर्देशक वी . शान्ताराम थे ।

वी . शान्ताराम का फिल्मों के नाम और प्रसिद्धि

v . Shantaram biography : उन्होंने अन्तर्मन को प्रभावित करने वाले वार्तालापों ( डायलोगों ) में विश्वास किया , इसीलिए वह वार्तालाप की सशक्तता पर विशेष जोर देते थे । उन्होंने इस कम्पनी के बैनर तले रानी साहिबा , खूनी खंजर , थंडर ऑफ हिल्स जैसी कुछ हल्की एवं गोपाल कृष्ण , आदमी , पड़ोसी , दुनिया न माने , सन्त ज्ञानेश्वर और अमृतमंथन जैसी कुछ सशक्त फिल्में बनाई ।

उनकी फिल्म अमृतमंथन इस कम्पनी के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई , क्योंकि इसका प्रदर्शन वेनिस फिल्मोत्सव में हुआ । साम्प्रदायिक एकता और सद्भावना की दृष्टि से उनकी फिल्म ‘ पड़ोसी ’ काफी उपयोगी रही । भारतीयों में स्वतन्त्रता आन्दोलन के प्रति जागृति लाने के लिए उन्होंने 1930 में ‘ स्वराज तोरण ‘ फिल्म बनाई । जिसमें छत्रपति शिवाजी की भूमिका उन्होंने स्वयं की , किन्तु ब्रिटिश सरकार के दबाव के कारण इसे काट – छाँटकर मजबूरन उदयकाल नाम से रिलीज करना पड़ा ।


v . Shantaram biography in hindi : 1943 में प्रभात कम्पनी से अलग होकर इन्होंने बम्बई में परेल स्थित वाडिया स्टूडियो खरीदा और अपने माता – पिता की स्मृति में राजकला मन्दिर की स्थापना की । इस बैनर तले पहली फिल्म उन्होंने ‘ शकुन्तला ‘ बनाई । तत्पश्चात् डॉ . कोटनीश की अमर कहानी , मतवाला शायर , अपना देश , दहेज , परछाईं , सुरंग , तीन बत्ती चार रास्ता , सुबह का तारा इत्यादि यादगार फिल्में बनाईं । वह हिन्दी , मराठी , बंगला एवं तमिल भाषा की फिल्मों के निर्माता थे ।

v . Shantaram biography in hindi : 1952 में उनकी महत्वपूर्ण फिल्म ‘ अमर भूपाली ’ हिन्दी , मराठी एवं बंगला में बनी , उन्होंने ‘ सीता कल्याणम् ‘ फिल्म तमिल में बनाई । उन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से अनेक सामाजिक बुराइयों दहेज , बेमेल विवाह , बाल विवाह आदि पर करारा प्रहार किया।


वी . शान्ताराम का फिल्मों मे अनेक प्रयोग

v . Shantaram biography : 1955 की लेकर अनेक प्रयोग किए । इस फिल्म में केन्द्रीय भूमिका नर्तक की रखकर नृत्यों का उनकी उल्लेखनीय फिल्म ‘ झनक झनक पायल बाजे ‘ रही । इसमें उन्होंने नृत्य और संगीत के पसन्द की गई । इसके गीत शास्त्रीय रागों पर आधारित होते हुए भी अत्यधिक लोकि फिल्मांकन किया । नूतन विषय और प्रस्तुतीकरण के कारण यह फिल्म दर्शकों द्वारा अि ‘ दहेज ‘ में सामाजिक बुराई दहेज पर जबर्दस्त चोट की , तो ‘ अमर ज्योति ‘ में महिला पर विशेष बल दिया गया ।

v . Shantaram biography : 1957 में तीन उल्लेखनीय फिल्में महबूब खान की ‘ मदर गुरुदत्त की ‘ प्यासा ‘ और शान्ताराम की ‘ दो आँखें बारह हाथ ‘ थी । (v . Shantaram biography ) जिन्होंने हिन्दी फिल्मों को उठाकर खुले वातावरण में उन्हें सुधारने पर जोर दिया गया । देश , काल , परिस्थिति परदेश अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति दिलाई । इनमें शान्ताराम की ‘ दो आँखें बारह हाथ ‘ में कैदियों की समस्या एवं वातावरण के कारण सात्विक व्यक्ति भी अपराधी बन जाता है।

अतएव ऐसे दी कैदियों को सुधारने का प्रयास किया जाना इस फिल्म का प्रमुख ध्येय था । अपने प्रभावी विषय और सबल निर्वाह के कारण इस फिल्म को अन्तर्राष्ट्रीय बर्लिन फिल्म समारोह के ‘ गोल्ड बेयर ‘ से पुरस्कृत किया गया और तभी राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से भी इसे विभूषित किया गया ।
इसके अतिरिक्त फिल्म –
नवरंग ( 1959 ) ,
सेहरा ( 1963 ) ,
गीत गाया पत्थरों ने ( 1964 ) ,
बूँद जो बन गई मोती ( 1967 ) ,
जल बिन मछली नृत्य विन बिजली ( 1969 ) ,

v . Shantaram biography : फिल्में उन्होंने बनाईं और फिल्म जगत् में लोकप्रियता हासिल की । हिन्दी जगत् में सशक्त विषयों एवं संगीत प्रधान फिल्में बनाने के बाद वह पुनः मराठी की तरफ अभिमुख हुए।


वी . शान्ताराम का मराठी फ़िल्मे के नाम


पिंजरा ( 1972 ) ,
चंदणाजी चोली अंग अंग जाली ( 1975 ) , और
चानी ( 1977 ) ,

v . Shantaram biography in hindi : इन सभी फिल्मों का निर्माण किया । 1982 झनक झनक पायल बाजे को उन्होंने 70 एम.एम. स्टीरियोफोनिक में फिर से बनाकर रिलीज किया और तदुपरान्त फिल्मी दुनिया से संन्यास ले लिया । कुल मिलाकर उन्होंने अपने सिनेमा जीवन में लगभग 82 फिल्मों का निर्माण और 55 फिल्मों का निर्देशन किया । अपनी अद्वितीय प्रतिभा से उन्होंने फिल्मी दुनिया में जो स्थान बनाया वह आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय रहेगा । अपनी नई शैली के द्वारा फिल्म जगत् में उन्होंने एक अमिट छाप छोड़ी ।

v . Shantaram biography in hindi : अपना सारा जीवन उन्होंने फिल्म उद्योग को समर्पित किया और उसके विकास के लिए सदैव उद्यत रहे । हिन्दी फिल्म को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने के लिए वह कृ संकल्प थे । फिल्म उद्योग के विकास की धुन अपने रोम – रोम एवं साँसों में समेटे उन्होंने 28 अक्टूबर , 1990 को 89 वर्ष की अवस्था में इहलीला समाप्त की ।

v shantaram family – wife, children,

v shantaram family : उनकी तीन पत्नियाँ , दो पुत्र और पाँच पुत्रियाँ हैं । उनकी पत्नियाँ जयश्री और संध्या अतीत की लोकप्रिय अभिनेत्रियाँ थी।  उनके एक पुत्र किरण शान्ताराम फिल्म निर्माता है । शान्ताराम एक योग्य कलाकार , प्रतिभावान् निर्माता एवं निर्देशक थे । सचमुच वे एक व्यक्ति नहीं , अपने आप में एक संस्था थे । उनकी मृत्यु पर संवेदना व्यक्त करते हुए गुलजार एक युग गुजर गया ” , तथा रणधीर कपूर के शब्द थे , “ जो बीज उन्होंने बोया था , उन्हीं की फसल आज हम लोग काट रहे है ।

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निष्कर्ष : हिंदी फिल्म के भीष्म पितामह

v . Shantaram biography in hindi : ” इस क्षेत्र में उनकी विशिष्टता इस बात से भी सिद्ध होती किया गया । भारत सरकार ने उन्हें ‘ पदमश्री ‘ से भी अलंकृत किया था । वह जब तक जीवित है कि 1986 में उन्हें सिनेमा जगत् के सर्वोत्तम सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित रहे , फिल्म उद्योग में ध्रुवतारे की तरह अटल थे और अब , जबकि वह इस दुनिया में नहीं है फिर भी अपनी फिल्मी कृतियों के माध्यम से युगों – युगों तक स्मरणीय रहेंगे । उन्हें सिनेमा जगत कहा था कि “ उनके जाने के बाद का भीष्म पितामह कहना कोई अतिरंजनापूर्ण कथन नहीं होगा ।

FAQ

वी . शान्ताराम के फिल्मों के नाम बताये?

रानी साहिबा , खूनी खंजर , थंडर ऑफ हिल्स जैसी कुछ हल्की एवं गोपाल कृष्ण , आदमी , पड़ोसी , दुनिया न माने , सन्त ज्ञानेश्वर और अमृतमंथन

वी . शान्ताराम का परिवार का परिचय दे!

v shantaram family : उनकी तीन पत्नियाँ , दो पुत्र और पाँच पुत्रियाँ हैं । उनकी पत्नियाँ जयश्री और संध्या अतीत की लोकप्रिय अभिनेत्रियाँ थी।  उनके एक पुत्र किरण शान्ताराम फिल्म निर्माता है ।

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