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प्रस्तावना : जन्म, माता-पिता, जन्म स्थान और बहन

short biography marie curie : मेरी क्यूरी ने अपने लगन , धैर्य , उत्साह एवं अथक् प्रयास से विपणता की लक्ष्मण रेखा को पार कर भारी विपरीत परिस्थितियों में शोधकार्य करके रेडियो सक्रिय ( Radioactive ) पदार्थों की खोज की । इनका जन्म पोलैण्ड की राजधानी वारसा ( Warsaw ) में नवम्बर , 1867 ई . को हुआ ।

इनका नाम मान्या स्क्लोदोवस्का रखा गया । इनकी बड़ी बहन का नाम ब्रोन्या था । इनके पिता एक उच्च विद्यालय में गणित एवं भौतिकी के शिक्षक थे । वे अत्यन्त ही स्वाभिमानी देशभक्त थे । उन्होंने पोलैण्ड के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भाग लिया । इसलिए उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया । जीविका के किसी अन्य साधन के अभाव में उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा ।

मैडम मेरी क्यूरी की माता की मृत्यु कब हुई?

short biography marie curie : कहा गया है कि विपत्ति अकेले नहीं आती है । अभी मान्या 11 वर्ष की हुई थी कि उनकी माँ का देहान्त हो गया । पूरे परिवार पर दुःख के बादल छा गए । जीवनयापन के लिए नौकरी माँ की मृत्यु के पश्चात् उन दोनों बहनों ने हिम्मत नहीं हारी । वे दोनों अपने अध्ययन में संलग्न रहीं । 16 वर्ष की आयु में मान्या ने सेकेण्ड्री परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया ।

इस सफलता के लिए उन्हें स्वर्ण पदक ‘ भी मिला । वस्तुतः बचपन से ही दोनों बहनें कुशाग्र बुद्धि की थीं । उन दिनों पोलैण्ड से लोग इंगलैण्ड या फ्रांस जाकर उच्च शिक्षा प्राप्त करते थे । दोनों बहनें पेरिस जाकर चिकित्साशास्त्र का अध्ययन करना चाहती थीं , परन्तु विपणता एवं घर की हालत देखकर उनके पिता अत्यंत ही चिन्तित थे ।

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मैडम मेरी क्यूरी ने जीवनयापन कैसे किया?

short biography marie curie : कहा गया है जहाँ चाह वहीं राह ‘ . मान्या ने अपने पिता को सांत्वना दी ।  मान्या ने काम करके अपना जीवनयापन करना प्रारम्भ किया । उन्होंने फ्रांस में अपनी बड़ी बहन ब्रोन्या के शिक्षा का भार भी अपने ही ऊपर उठा लिया । सम्पन्न घरों के बच्चों की देखभाल कर उन्होंने धनार्जन करना प्रारम्भ किया । इस धन का अधिकांश भाग पेरिस में ब्रोन्या की शिक्षा पर व्यय होता था । पेरिस में ब्रोन्या चिकित्सा शास्त्र का अध्ययन कर रही थी ।

नौकरी के दौरान मान्या को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा । जिस घर में वह कार्यरत् थी , उस धनी व्यक्ति का पुत्र मान्या की ओर आकर्षित हो गया । वह उसके साथ वैवाहिक सूत्र में बँधना चाहता था , परन्तु मान्या के मन में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की ललक थी । विवाह के पश्चात् मान्या के अध्ययन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशा थी । अतः मान्या ने उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया । मान्या को वहाँ से अपनी नौकरी भी छोड़नी पड़ी । वह एक अन्य घर में काम करने लगी ।

मान्या की कई वर्षों की कड़ी मेहनत के फलस्वरूप उसकी बड़ी बहन ने चिकित्साशास्त्र में अपना अध्ययन पूरा करके , पेरिस में शादी भी कर ली एवं वहीं उसने अपना फ्लैट भी ले लिया ।

short biography marie curie

नाममान्या स्क्लोदोवस्का ( मैडम मेरी क्यूरी)
जन्मनवम्बर , 1867 ई .
जन्म स्थानपोलैण्ड की राजधानी वारसा
बड़ी बहनब्रोन्या
पिताउच्च विद्यालय में गणित एवं भौतिकी के शिक्षक थे
विवाह25 जुलाई , 1895
पतिपियरे क्यूरी
डिग्रीडॉक्टरेट ऑफ साइंस
दो पुत्रियाँआइरीन एवं इव
मृत्यु4 जुलाई , 1934
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मैडम मेरी क्यूरी की फ्रांस में  उच्च शिक्षा


24 वर्ष की आयु में सन् 1891 में मान्या पेरिस चली गई . उसने अपना नामांकन सोब विश्वविद्यालय में करा लिया . बड़ी बहन ब्रोन्या , मान्या को अपने साथ रखना चाहती थी , परन्तु मान्या उनके साथ न रहकर स्वतंत्र जीवन व्यतीत करना चाहती थी । उसने किराए पर एक छोटी कोठरी ले ली जिसमें हवा एवं धूप का उचित प्रबन्ध भी नहीं था ।

जाड़े के दिनों में कभी – कभी पेरिस बर्फ से आच्छादित हो जाता है . उस समय कोयला जलाकर लोग अपने घरों को गर्म रखते थे , परन्तु धनाभाव के कारण मान्या थोड़ा – सा ही कोयला जलाकर कष्टपूर्वक रात्रि व्यतीत करती थी । गर्म जल के स्थान पर घरेलू कार्य में उसे ठण्डा जल ही प्रयुक्त करना पड़ता था ।

अपनी शिक्षा एवं घर खर्च हेतु मान्या को कई काम करने पड़ते थे । कार्य की अधिकता एवं पौष्टिक आहार की कमी से कई बार उसके हाथ – पैरों में स्वतः कम्पन होता था ।

कभी कभी की असह्य वेदना से वह मूर्च्छित हो जाती थी । इतनी कठिनाइयों के बावजूद मान्य के उत्साह में कभी कोई कमी नहीं आई । वह अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर अग्रसर रही । भूख उन दिनों विश्वविद्यालय में उन्हें प्रसिद्ध भौतिकीविद् एडमंड बाउंटी एवं श्री ग्रेबियल लिपमैन के व्याख्यान सुनने का अवसर प्राप्त हुआ ।

मान्य रक्लोदोवस्का को ‘ मेरी ‘ के नाम क्यों जाना जाता है?

short biography marie curie :  इसके फलस्वरूप उसके मन में भौतिकी के प्रति रुचि जाग्रत हुई । सन् 1893 में उन्होंने भौतिकी की परीक्षा में प्रथम श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया । सन् 1894 में गणित की परीक्षा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया

। उनकी सफलता एवं मेहनत से प्रसन्न होकर सोर्बो विश्वविद्यालय पेरिस के भौतिकीविद् लिपमैन ने अपने शोध कार्य में सहयोग देने के लिए उन्हें नियुक्त कर लिया । फ्रांसीसियों को उनके नाम के उच्चारण में कठिनाई होती थी । अतः लोग उन्हें ‘ मेरी ‘ कहकर पुकारने लगे । इस प्रकार लोग मान्य रक्लोदोवस्का को ‘ मेरी ‘ के नाम से जानने लगे ।

दाम्पत्य जीवन :short biography marie curie


short biography marie curie :  उन दिनों मेरी पेरिस में पोलैण्ड निवासी अपने मित्र के घर जाया करती थीं । संयोगवश वहीं उनका परिचय पियरे क्यूरी नामक एक युवक से हुआ । उसकी रुचि वैज्ञानिक अनुसंधानों की ओर थी । वह भौतिकी एवं गणित का भी ज्ञाता था । उन दिनों पियरे विद्युत् सम्वन्धी कई नए अन्वेषणों में व्यस्त थे । वे स्वभाव से शांत , सरल एवं गम्भीर थे । इनका स्वभाव मेरी से मिलता – जुलता था । ये दोनों 25 जुलाई , 1895 को प्रणय – सूत्र में आवद्ध हो गए । विवाह के पश्चात् लोग इन्हें मेरी क्यूरी के नाम से जानने लगे ।

शोधकार्यों में भागीदारी : short biography marie curie


short biography marie curie : पियरे को जीवन साथी पाकर मेरी अत्यन्त ही प्रसन्न थीं । पियरे अध्यापन करते थे , परन्तु इनका वेतन कम था । इससे दोनों के जीवन का निर्वाह कठिनाईपूर्वक होता था । उन दोनों ने अपने आवास स्थान पर ही एक छोटीसी प्रयोगशाला स्थापित कर ली ।

इसके व्यय का भार भी इन्हें अपनी अल्प आय के एक भाग से वहन करना पड़ता था । उन्हीं दिनों सन् 1896 में बैकुरल अपने एक शोध में रत् थे । उनका मत था कि यूरेनियम नामक एक भारी तत्व से कुछ किरणें निर्गत होती हैं । मेरी क्यूरी ने पी – एच.डी . की डिग्री प्राप्त करने हेतु शोध कार्य के लिए इसी विषय का चयन किया । वह अपने शोध में ” जुट गईं ।

मेरी ने यह पता लगाया कि
( i ) यूरेनियम से कुछ किरणें निर्गत होती हैं ।
( ii ) यूरेनियम के अतिरिक्त थोरियम में भी विकिरण उत्सर्जन ( रेडियो सक्रियता ) का गुण है ।

रेडियम का आविष्कार – पिचब्लैंडी? short biography marie curie


short biography marie curie : सन् 1897 में क्यूरी ने एक बच्ची को जन्म दिया , जिसका नाम आइरीन रखा । प्रयोग – शाला में कार्य करने के अतिरिक्त मेरी को अपनी पुत्री की देखभाल भी करनी पड़ती थी । उस पर उन्हें कुछ धनराशि भी व्यय करनी पड़ती थी । इससे उनका आर्थिक संकट गहराया , परन्तु क्यूरी दम्पत्ति अपने अदम्य साहस एवं उत्साह से अपने शोध कार्य में जुटे रहे । यूरेनियम अत्यन्त ही मूल्यवान् होता है ।

उन दिनों इसे खरीदने के लिए क्यूरी दम्पत्ति के पास पर्याप्त धन नहीं था । अपने शोध के क्रम में उन्हें पिचब्लैंडी नामक एक रेडियो सक्रिय पदार्थ मिला । जो काले भूरे रंग का एक खनिज है । यह शुद्ध यूरेनियम से अधिक रेडियो सक्रिय होता है । अपनी इस खोज पर दोनों अत्यन्त ही संतुष्ट थे ।

उनके शोध कार्य में अनेक प्रकार से आर्थिक कठिनाई रही । वस्तुतः पिचब्लैंडी से यूरेनियम तत्व को अलग करने के बाद यह व्यर्थ माना जाता है एवं इसके मूल्य में काफी कमी हो जाती है । परन्तु यूरेनियम पृथक् की गई सस्ती पिचब्लैंडी को खरीदने के लिए भी क्यूरी दम्पत्ति के पास पर्याप्त धन नहीं था ।

किसी प्रकार कुछ धनराशि ऋण लेकर उन्होंने पिचलैंडी आस्ट्रिया से आयात की । उन्होंने केवल 30 टन पिचब्लैंडी से रासायनिक विधियों द्वारा क्यूरी दम्पत्ति के कठोर परिश्रम और शोध कार्य में उनकी लगन का अनुमान इस तथ्य भिन्न – भिन्न तत्वों को अलग करके केवल 2 मिलीग्राम रेडियम प्राप्त किया । इनके द्वारा एक अन्य रेडियो सक्रिय पदार्थ की भी खोज की गई । जिसका नाम मैडम क्यूरी की जन्म भूमि पोलैण्ड के नाम पर ‘ पोलोनियम ‘ रखा गया ।

सफलता का सोपान : डॉक्टरेट ऑफ साइंस

short biography marie curie : रेडियम के गुणों के अध्ययन के क्रम में उन्होंने बताया कि इस तत्व से अति सूक्ष्म कण निर्गत होते हैं , जो ऋणावेशित , धनावेशित एवं अनावेशित होते हैं । इन कणों को बीटा ( β ) कण , अल्फा ( α ) कण एवं गामा ( γ ) किरण कहते हैं । इनकी भेदन क्षमता , द्रव्यमान ( mass ) इत्यादि गुण एवं एक – दूसरे से भिन्न होते हैं ।

इन कणों से कई बीमारियों की इलाज की भी सम्भावना है । रेडियम के गुणों के अध्ययन हेतु जून , 1903 में मेरी को डॉक्टरेट ऑफ साइंस की डिग्री से विभूषित किया गया एवं रॉयल सोसायटी के ‘ डेवी पदक ‘ से भी विभूषित किया गया ।

रेडियो सक्रियता पर कार्य के लिए सन् 1903 के भौतिकी का नोबेल पुरस्कार संयुक्त रूप से मेरी क्यूरी , पियरे क्यूरी एवं बैकुरल को प्रदान किया गया । मानवता की भलाई को दृष्टिगत रखकर रेडियोएक्टिव विकिरण से मैडम क्यूरी ने = रेडियम निर्माण की विधि उद्योगपतियों को निःशुल्क ही बता दी ।

मैडम मेरी क्यूरी के पति की मृत्यु कब और कैसे हुई?

short biography marie curie : 19 अप्रैल , 1906 को मेरी क्यूरी पर विपत्ति का पहाड़ टूटा । उस दिन एक सड़क दुर्घटना में इनके पति पियरे क्यूरी की मृत्यु हो गई । पति वियोग से मेरी क्यूरी छटपटा गईं । पियरे एक पति के अतिरिक्त उनके सच्चे वैज्ञानिक सहयोगी भी थे ।

उनके निधन के आघात को सहन करते हुए मेरी ने अपना शोध कार्य जारी रखा । वे एक कठिन परिस्थिति से गुजर रही थीं । उन्हें शोध के अतिरिक्त अपनी दो पुत्रियाँआइरीन एवं इव पर भी ध्यान देना पड़ता था । उन्हीं दिनों मैडम क्यूरी को उनके पति के स्थान पर भौतिकी का प्रोफेसर नियुक्त किया गया ।

रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार  कब मिला?

short biography marie curie : रेडियम और पोलोनियम की खोज , उनके शुद्ध अवस्था में निर्माण , परमाणु भार निर्धारण तथा गुणों के अध्ययन के लिए मेरी क्यूरी को सन् 1911 को रसायन का पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। गया . इस प्रकार दो बार नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली वह प्रथम व्यक्ति हो गईं ।

इसके पूर्व किसी भी व्यक्ति को दो बार नोबेल पुरस्कार नहीं मिला था । मैडम क्यूरी की जनसेवा रेडियो सक्रिय पदार्थों की खोज के बाद मैडम क्यूरी ने लोगों को इसकी उपयोगिता के बारे में जानकारी देना प्रारम्भ किया ।

उन्होंने संसार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दिए । अपने जन्मस्थान वारसा , पोलैण्ड में सन् 1932 में उन्होंने एक रेडियम संस्थान की स्थापना की । फ्रांस सरकार द्वारा स्थापित रेडियम संस्थान को भी उन्होंने विभिन्न उपस्करों * ( Equipment ) से सुसज्जित किया ।

मेरी क्यूरी की पुत्री आइरीन क्यूरी ( Irene Curie ) और उनके पति ( Federic Joliot ) ने तत्वों पर अल्फा कणो के ‘ बम्बार्डमेंट ‘ से कृत्रिम रेडियो एक्टिव पदार्थों के उत्पादन में सफलता प्राप्त की ।

इस कार्य के लिए आइरीन जूलियो – क्यूरी ( Irene Joliot – Curie ) को वर्ष 1935 को रसायन का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया ।

मैडम मेरी क्यूरी की मौत कब और कैसे हुई?

short biography marie curie : रेडियो सक्रिय पदार्थ के कुप्रभावों से मैडम मेरी क्यूरी अपने शरीर को सुरक्षित नहीं रख सकीं । इसके कुप्रभाव से इनके शरीर में रक्त की कमी ( ल्यूकेमिया ) हो गयी । इसके कारण इनकी मृत्यु 4 जुलाई , 1934 को हो गई । उन्होंने सादगी , अदम्य उत्साह एवं कठिन परिश्रम से सफलता के उच्चतम् शिखर पर पहुँचकर आजीवन मानवता की सेवा की विज्ञान जगत् मैडम क्यूरी का सदैव ऋणी रहेगा ।

निष्कर्ष : short biography marie curie

short biography marie curie : आज हमने short biography marie curie मे मैडम मेरी क्यूरी की सम्पूर्ण जीवन परिचय को जाना है। मैडम मेरी क्यूरी एक गर्व पूर्ण और साहशी महिला थी। मैडम मेरी क्यूरी की अनमोल बातो को हमने आज short biography marie curie अर्टिकल मे जाना है।

Faq – short biography marie curie

मैडम मेरी क्यूरी का बचपन का नाम क्या था?

मान्या स्क्लोदोवस्का

मैडम मेरी क्यूरी के पति कौन थे?

पियरे क्यूरी । पियरे क्यूरी एक विज्ञानिक थे।

मेरी क्यूरी ने जीवनयापन कैसे किया?

सम्पन्न घरों के बच्चों की देखभाल करके।