डॉ . राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय | rajendra prasad ka jivan parichay

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डॉ . राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय | rajendra prasad ka jivan parichay

rajendra prasad ka jivan parichay – डॉ . राजेन्द्र प्रसाद “ उनके बारे में कुछ और कहने की बजाय यह कहना उचित होगा कि वह एक सज्जन पुरुष थे , जोकि भारतीय जीवन पद्धति और सच्चे भारतीय के प्रतीक थे . हमारे देश के स्वतन्त्रता के इतिहास में उनकी सेवाएँ एक पारम्परिक कथा बन गई हैं … असाधारण सरलता , महानता , मानवता और आडम्बरहीन जीवन उन्हें उन लोगों का जनप्रिय उनकी का दर्जा प्रदान करता है ।

जिनके लिए उन्होंने स्वतन्त्रता प्राप्त करने के लिए संघर्ष किया और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद जनजीवन को नया रूप प्रदान करने में मार्गदर्शन किया . लगातार पूरी दो अवधि तक भारत के राष्ट्रपति के रूप में इस सर्वोच्च प्रतिष्ठित और प्राधिकार वाले पद को असाधारण सम्मान के साथ सुशोभित किया । उन्होंने सही संवैधानिक परम्पराओं के मानक स्थापित किए । ” यह टिप्पणी 1 मार्च , 1963 को राज्य सभा में भारत माँ प्रसाद के गुणों को प्रकट करते हुए डॉ . एस . राधाकृष्णन् ने की थी ।

सही मायने में डॉ . के सपूत डॉ . राजेन्द्र राजेन्द्र प्रसाद एक सच्चे राष्ट्रवादी , गांधीवादी विचारधारा में विश्वास रखने वाले , प्रखर राजनीतिज्ञ , प्रख्यात विधिवेत्ता , वाकपटु सांसद एक श्रेष्ठ प्रशासक थे । वे भारतीय संस्कृति में पूर्णतः रचे बसे एवं सादगी में विश्वास करने वाले श्रेष्ठ व्यक्तित्व थे । राष्ट्र के लिए उनके योगदान को भुलाना कभी सम्भव नहीं है ।

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dr rajendra prasad biography in hindi language में डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति और राष्ट्र के एक महान नेता थे।  वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अग्रणी नेताओं में से एक थे।  वह स्वतंत्रता संग्राम के दिग्गज थे और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  डॉ. प्रसाद को आधुनिक भारत के निर्माता और देश को पहला संविधान देने वाले व्यक्ति के रूप में भी याद किया जाता है।

rajendra prasad ka jivan parichay – डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म जिले के बिहटा नामक एक छोटे से गांव में हुआ था।  राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति और राष्ट्र के एक महान नेता थे।  वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अग्रणी नेताओं में से एक थे।  वह स्वतंत्रता संग्राम के दिग्गज थे और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

डॉ. प्रसाद को आधुनिक भारत के निर्माता और देश को पहला संविधान देने वाले व्यक्ति के रूप में भी याद किया जाता है।  वह एक स्व-निर्मित व्यक्ति थे, जो विनम्र शुरुआत से उठकर स्वतंत्र भारत के महानतम नेताओं में से एक बन गए।  मानवता की सेवा में उनकी उपलब्धियां कई हैं;  उनका जीवन सेवा, त्याग और देशभक्ति से ओतप्रोत था।  वे आस्थावान और महान परोपकारी व्यक्ति थे।

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद का जन्म कब और कहाँ हुआ?

rajendra prasad ka jivan parichay – भारत के इस महान् व्यक्तित्व का जन्म 3 दिसम्बर , 1884 को बिहार राज्य के सारन नामक जिले ( वर्तमान सिवान ) के जीरोदेई नामक ग्राम में हुआ था । उनके पिता का नाम महादेव सहाय एवं माता का नाम कमलेश्वरी देवी था । उनका पूरा परिवार सरल , शुद्ध , व्यावहारिक एवं समर्पित था ।  वे एक अच्छे जमींदार परिवार से ताल्लुक रखते थे फिर भी उनके व्यवहार , रहन – सहन में लेशमात्र भी दिखावा नहीं था . उनके पिता महादेव सहाय फारसी एवं संस्कृत के उस काल में ख्याति प्राप्त विद्वान् थे ।

वे आयु र्वेदिक एवं यूनानी औषधियों से लोगों का निःशुल्क उपचार करते थे जिससे उन्हें अपार … प्रसन्नता की अनुभूति होती थी। डॉ . राजेन्द्र प्रसाद को बचपन में राजन के नाम से जाना जाता था . उनकी माताजी वालक राजन को अक्सर रामायण एवं महाभारत की कहानियाँ सुनाया करती थीं जिसका उनके वालक मन पर गहरा प्रभाव पड़ा था . उस समय उनके गांव में शिक्षा की कोई व्यवस्था नहीं थी ।

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की शादी किसके साथ हुई थी? डॉ राजेंद्र प्रसाद की पत्नी का नाम?

rajendra prasad ka jivan parichay – पहले शादियाँ छोटी उम्र में हो जाया करती थीं। इसके चलते राजेन्द्र प्रसाद का विवाह सन् 1897 ई . में मात्र तेरह वर्ष की उम्र में राजवंशी देवी के साथ कर दिया गया था । उनसे राजेन्द्र प्रसाद को दो पुत्र प्राप्त हुए . इन सब प्रक्रियाओं के साथ ही उन्होंने अपने अध्ययन को लगातार जारी रखा .

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वास्तविक नाम– राजेन्द्र प्रसाद
जन्म– 3 दिसम्बर , 1884 ई .
जन्म स्थान – सारन ( उत्तरी बिहार )
पिता – महादेव सहाय
शिक्षा – 1. प्रारम्भिक शिक्षा ( घर पर )
            2. छपरा जिला स्कूल से हाईस्कूल
            3. उच्च शिक्षा प्रेसीडेन्सी कॉलेज ( 1902 ) कलकत्ता

पुस्तकें –  इण्डिया डिवाइडेड , सत्याग्रह इन चम्पारण , महात्मा गांधी एण्ड बिहार एट दा फीट ऑफ महात्मा गांधी ।

सर्वाजनिक जीवन –

1. 1916 के बम्बई अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष
2 . सुभाषचन्द्र बोस के इस्तीफे के बाद 1939 में कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता ।
3 .1946 में खाद्य एवं कृषि मंत्री .
4. भारत के प्रथम राष्ट्रपति ( 26 जनवरी , 1950 से 13 मई , 1962 )
मृत्यु – 28 फरवरी , 196

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की प्रारम्भिक शिक्षा कहाँ हुई थी?

rajendra prasad ka jivan parichay – डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की प्रारम्भिक शिक्षा अपने गाँव के एक मौलवी से हुई थी । जिसने उन्हें फारसी की शिक्षा दी थी . आगे की पढ़ाई उन्होंने छपरा के एक हाईस्कूल में की थी , जो कलकत्ता विश्वविद्यालय के अन्तर्गत आता था . उस दौरान कलकत्ता विश्वविद्यालय का क्षेत्राधिकार बंगाल , बिहार , उड़ीसा , असम एवं वर्मा ( म्यांमार ) तक फैला हुआ था . राजन ने हाईस्कूल की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर सबको अचम्भे में डाल दिया था ।

हाईस्कूल की प्रवेश परीक्षा के बाद राजेन्द्र बाबू ने कलकत्ता के प्रेसीडेन्सी कॉलेज में दाखिला लिया . श्रेष्ठ नेतृत्व का गुण होने के परिणामस्वरूप उन्हें कनिष्ठ होने की स्थिति में भी स्टूडेन्ट्स यूनियन का लोकप्रिय थे . उनमें राष्ट्र दौरान प्रेसीडेन्सी कॉलेज में सेक्रेटरी चुना गया . भक्ति कूट – कूट कर भरी हुई थी . राजेन्द्र बाबू के अध्ययन के दौरान राजेन्द्र बाबू अत्यन्त अध्ययनकाल के जगदीश महान् वैज्ञानिक जगदीश चन्द्र बोस भी पढ़ा करते थे . चन्द्र बोस ने राजेन्द्र प्रसाद को विज्ञापन विषय लेने को कहा , लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया ।

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सन् 1903 में बंगाल विभाजन –  डॉ . राजेन्द्र प्रसाद


rajendra prasad ka jivan parichay – सन् 1903 में बंगाल विभाजन के दौरान विभाजन के विरुद्ध हो रहे। आन्दोलनों , प्रदर्शनों एवं राष्ट्रवादियों के भाषण से उनके मन पर गहरा असर पड़ा । कलकत्ता विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने सन् 1906 में पहली वार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में भाग लिया , लेकिन इतने से उनसे रहा नहीं गया और 1908 में राजेन्द्र बाबू ने कलकत्ता में बिहार के छात्रों को एकत्रित कर बिहार स्टूडेन्ट्स कॉन्फ्रेन्स की स्थापना की , जो सम्पूर्ण भारत में इस तरह का उस दौरान एकमात्र संगठन था ।


समस्त गतिविधियों के साथ – साथ राजेन्द्र बाबू ने अपनी स्नातक की परीक्षा ऊँचे दर्जे से पास कर अंग्रेजी में स्नातकोत्तर परीक्षा के लिए प्रवेश लिया । इस परीक्षा के उत्तीर्ण होने के पश्चात् राष्ट्रीय सेवा के उद्देश्य हेतु अन्य विद्यार्थियों की तरह उन्होंने भी विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया।विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश के पश्चात् डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की मुलाकात गोपालकृष्ण गोखले से हुई । 

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद का पेशा | डॉ . राजेन्द्र प्रसाद क्या काम करते थे?


rajendra prasad ka jivan parichay – जो उन दिनों सर्वेन्ट्स ऑफ इण्डिया सोसायटी चला रहे थे । गोपालकृष्ण गोखले ने डॉ . राजेन्द्र प्रसाद को इस सोसायटी में सम्मिलित करने का भरसक प्रयास किया , लेकिन पारिवारिक असहमति के फलस्वरूप वे इससे नहीं जुड़ सके . विधि की पढ़ाई पूरी कर सन् 1911 से कलकत्ता में राजेन्द्र बाबू ने अपनी प्रैक्ट्सि प्रारम्भ की ।

अध्यधिक कानूनी पकड़ , सच्चरित्रता एवं तर्कसंगत दलीलों के आधार पर वे श्रेष्ठ वकील के रूप में प्रतिष्ठापित हुए । तत्कालीन प्रख्यात विधिवेत्ता , विद्वान् न्यायाधीश एवं कलकत्ता विश्वविद्यालय के उपकुलपति आशुतोष मुखर्जी डॉ . राजेन्द्र प्रसाद से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने राजेन्द्र वावू को कलकत्ता विश्वविद्यालय के विधि विभाग का प्राध्यापक बना दिया . प्राध्यापक पद पर रहते राजेन्द्र प्रसाद ने सन् 1915 ई . में विधि में स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण की जिसमें उन्होंने हुए सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया ।

सन् 1916 में पटना उच्च न्यायालय की स्थापना होने के साथ ही राजेन्द्र बाबू पटना आकर वकालात करने लगे . ही उन दिनों चम्पारण सत्याग्रह जोरों पर था . सन् 1917 राजेन्द्र प्रसाद की मुलाकात महात्मा गांधी से हुई . इससे पहले वे कांग्रेस के लखनऊ अधिवेशन में महात्मा गांधी को देख चुके थे । गांधीजी के आह्वान पर राजेन्द्र बाबू सत्याग्रह में शामिल हुए तथा इसी समय से वे गांधीवादी विचारधारा के भक्त बनकर रह गए . गांधीजी के सम्पर्क से राजेन्द्र वावू अत्यन्त सरल , विनीत एवं स्वावलम्बी बन गए ।

रॉलेट एक्ट एवं जलियाँवाला हत्याकाण्ड


rajendra prasad ka jivan parichay – रॉलेट एक्ट एवं जलियाँवाला हत्याकाण्ड जैसी घटनाओं से क्षुब्ध होकर राजेन्द्र बाबू ने महात्मा गांधी के असहयोग आन्दोलन को सर्वोपरि माना । इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले बिहार से राजेन्द्र प्रसाद पहले व्यक्ति थे . इसी समय राजेन्द्र प्रसाद ने अपनी वकालत छोड़कर स्वतंत्रता आन्दोलन में पूरी तरह से जुट जाने का संकल्प लिया । गांधीजी से राजेन्द्र बाबू का अत्यन्त भावनात्मक लगाव हो चुका था . जिस समय गांधीजी को 6 मास का कारावास दिया गया उस समय एक छोटे बच्चे की तरह राजेन्द्र बाबू फूट – फूट कर रो रहे थे ।

सन् 1923 में नागपुर में फ्लैग सत्याग्रह के दौरान राजेन्द्र बाबू ने सक्रिय रूप से भाग लिया । इस सत्याग्रह का नेतृत्व वल्लभभाई पटेल के जेल जाने के पश्चात् स्वयं राजेन्द्र वावू ने सँभाला था । सन् 1930 ई . में नमक सत्याग्रह में भाग कारण राजेन्द्र बाबू को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया . वे 1934 में कारावास से रिहा किए गए . भारत छोड़ो आन्दोलन प्रस्ताव के पास होने के बाद उन्हें पुनः 1942 में जेल भेजा गया जहाँ पर वे 1945 तक जेल में रहे । उनकी कार्यकुशलता एवं योग्यता को देखते हुए सन् 1935 1939 एवं 1947 में उन्हें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया के गया ।

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद का जीवन परिचय | rajendra prasad ka jivan parichay |

वास्तविक नामराजेन्द्र प्रसाद
जन्म3 दिसम्बर , 1884 ई .
जन्म स्थानसारन ( उत्तरी बिहार )
पिता महादेव सहाय
शिक्षा1. प्रारम्भिक शिक्षा ( घर पर )            
2. छपरा जिला स्कूल से हाईस्कूल            
3. उच्च शिक्षा प्रेसीडेन्सी कॉलेज ( 1902 ) कलकत्ता
पुस्तकेंइण्डिया डिवाइडेड , सत्याग्रह इन चम्पारण , महात्मा गांधी एण्ड बिहार एट दा फीट ऑफ महात्मा गांधी ।
सर्वाजनिक जीवन1. 1916 के बम्बई अधिवेशन में कांग्रेस के अध्यक्ष
2 . सुभाषचन्द्र बोस के इस्तीफे के बाद 1939 में कांग्रेस अधिवेशन की अध्यक्षता ।
3 .1946 में खाद्य एवं कृषि मंत्री .
4. भारत के प्रथम राष्ट्रपति ( 26 जनवरी , 1950 से 13 मई , 1962 )
मृत्यु28 फरवरी , 1963
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डॉ . राजेन्द्र प्रसाद के गुण क्या-क्या थे?

rajendra prasad ka jivan parichay – एक श्रेष्ठ शिक्षाविद् , प्रखर कानूनविद् , राष्ट्रीय सेवक एवं प्रशासक के साथ ही वे एक अच्छे लेखक भी थे । राजेन्द्र प्रसाद को हिन्दी , संस्कृत , फारसी एवं उर्दू भाषा का अच्छा ज्ञान था . 1920 के आरम्भिक दशक में उन्होंने अंग्रेजी पाक्षिक ‘ सर्च लाइट ‘ एवं हिन्दी साप्ताहिक ‘ देश ‘ का सम्पादन किया ।

हिस्ट्री ऑफ चम्पारन सत्याग्रह ( 1917 ) , इण्डिया डिवाइडेड ( 1946 ) आत्मकथा ( हिन्दी 1946 ) , ऑटोबायोग्राफी ( 1957 ) , एट दी फीट ऑफ महात्मा गांधी ( 1955 ) , इत्यादि पुस्तकें प्रकाशित हुईं । जो उनकी श्रेष्ठ लेखकीय क्षमता को अभिव्यक्त करती हैं ।

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद द्वारा किसान सहायक काम ?

rajendra prasad ka jivan parichay – डॉ . राजेन्द्र प्रसाद पण्डित जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्वकाल में गठित अस्थायी सरकार में खाद्य एवं कृषि मंत्री बनाए गए . इस पद पर रहते हुए उन्होंने किसानों के लिए महत्वपूर्ण योजनाएँ क्रियान्वित की ।  उन्होंने अधिक अन्न उपजाओ का नारा दिया था । स्वतंत्र भारत के संविधान बनाने के लिए 1946 में संविधान सभा की स्थापना की गई थी। जिसमें बिहार प्रान्त से उन्हें एक प्रतिनिधि के रूप में चुना गया था ।

उनकी योग्यता एवं कार्य कुशलता के फलस्वरूप संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में उन्हें निर्विरोध निर्वाचित किया गया था . संविधान सभा के अन्तिम सत्र के पहले दिन 24 जनवरी , 1950 को सर्व सम्मति से डॉ . राजेन्द्र प्रसाद को भारत का अनन्तिम राष्ट्रपति चुना गया था ।

डॉ . राजेन्द्र प्रसाद की मृत्यु कैसे हुई?


rajendra prasad ka jivan parichay – इस पद के लिए 26 जनवरी , 1950 को उन्होंने शपथ ली थी । 1952 एवं 1957 में इन्होंने राष्ट्रपति पद सँभाला । 12 वर्षों के लम्बे अन्तराल तक राष्ट्रपति के पद को सँभालने के पश्चात् भी इस महापुरुष की सादगी में कोई परिवर्तन नहीं आया । वे स्वयं का कार्य स्वयं करते थे एवं प्रतिदिन चरखा कातते थे । सन् 1962 में राष्ट्रपति के पद से मुक्त होकर डॉ . राजेन्द्र प्रसाद पटना के सदाकत आश्रम में चले गए । जहाँ से 28 फरवरी , 1963 को इस महान् पुरुष को परमपिता परमेश्वर ने अपनी सत्ता में समाहित कर लिया ।

निष्कर्ष – Rajendra Prasad ka Jivan Parichay

rajendra prasad ka jivan parichay मे हमने dr. rajendra prasad का सम्पूर्ण जीवन parichay को जाना। Dr. Rajendra prasad को हम भारतवासी कभी भी नही भूल सकते हैं। rajendra prasad ka jivan parichay हम भारत वासियो के लिए महत्वपूर्ण हैं।


डॉ राजेंद्र प्रसाद की पत्नी का नाम क्या है?

राजवंशी देवी