Raikrishna Das biography in hindi
Raikrishna Das biography in hindi

Raikrishna Das biography in hindi | रायकृष्ण दास जीवनी

रायकृष्ण दास जीवनी

रायकृष्ण दास जीवनी : रायकृष्ण दास चित्रकला , मूर्तिकला के मर्मज्ञ श्रेष्ठ कला संग्रही और साहित्यकार रायकृष्ण दास की जन्मशती 13 नवम्बर , 1992 से देश में मनाई जा रही है । काशी को चिन्तन , मनन और सृजन की नगरी कहा जाता है। यहीं 13 नवम्बर , 1892 को एक सम्पन्न अभिजात्य परिवार में रायकृष्ण दास का जन्म हुआ था । काशी में इन्हें ‘ नेही ‘ उपनाम से जाना जाता था । ‘ नेही ‘ सम्भवतः ‘ स्नेही ‘ का ही संक्षिप्त रूप बन गया होगा ।

Raikrishna Das biography in hindi  : एक सम्पन्न घराने में पूर्ण वैभव – विलास के साथ जीवन बिताने के बाबजूद रायकृष्ण दास कला के प्रति पूर्ण समर्पित कैसे हुए ? यह उनकी कला साधना को जानकर ही समझा जा सकता है । ‘ भारत कला भवन ‘ कला के प्रति उनकी गहन निष्ठा और समर्पण का प्रत्यक्ष प्रमाण है । अपने कलाकार मित्रों में सरकार के नाम से पहचाने जाने वाले रायकृष्ण दास कला जगत् के वास्तव में ‘ सरकार ‘ थे । यह कहना कठिन है कि रायकृष्ण दास मूलतः क्या थे ? चित्रकला , मूर्तिकला , पुरातत्व , कला संग्रह और साहित्य में उनकी गहरी पैठ थी ।

रायकृष्ण दास जीवनी चाट

नामरायकृष्ण दास
जन्म13 नवम्बर , 1892
उपनामनेही
जन्म स्थानकाशी के एक सम्पन्न अभिजात्य परिवार में
मृत्यु 1985
माता-पिता गंगाबीबी-कल्याणदास
कार्यकथाकार,लेखक, गद्य गीतकार, कहानीकार
योगदानकथाकार के रूप में
नाटकदुःखिनी बाला ‘, ‘पद्मावती ‘ तथा ‘महाराणा प्रताप ‘
प्रसिद्धगद्यगीत लेखक और कहानीकार के रूप में
पुरस्कार पद्मविभूषण
Raikrishna Das biography in hindi

रायकृष्ण दास आरंभि जीवन

रायकृष्ण दास जीवनी : यद्यपि प्रारम्भ में वे एक भावुक कथाकार के रूप में साहित्य जगत् में प्रतिष्ठित हुए , किन्तु कालान्तर में वे चित्रकला में इतने रमे कि । साहित्यकार की उनकी पहचान ओझल होती गई . ‘ भारत कला भवन ‘ की स्थापना के बाद , तो रायकृष्ण दास विश्व स्तर के प्रसिद्ध कला मर्मज्ञ के रूप में प्रतिष्ठित हो चुके थे ।  साहित्यकार रायकृष्ण दास एक साहित्यकार के रूप में रायकृष्ण दास प्रेमचन्द के समकालीन कहानीकार थे । छायावाद के प्रमुख कवि कथाकार जयशंकर प्रसाद उनके प्रमुख मित्रों में थे ।

Raikrishna Das biography in hindi  : उनसे रायकृष्ण दास की बहुत घनिष्ठता थी । प्रसाद की भावुकता व रूमानी आदर्शवाद की छाप रायकृष्ण दास की अनेक कहानियों में देखी जा सकती है ।
रायकृष्ण दास मुख्यतः कहानीकार हैं – ‘ साधना ‘ , ‘ अनाख्या ‘ और ‘ सुधांशु ’ उनके कहानी संग्रह हैं ।

उनकी कहानियों पर टिप्पणी करते हुए डॉ . नगेन्द्र द्वारा सम्पादित ‘ हिन्दी साहित्य इतिहास ‘ में लिखा गया है- ” रायकृष्ण दास ने प्रसाद की तरह भाव प्रधान कहानियों की रचना की । कवित्वपूर्ण वातावरण की सृष्टि और नाटकीय शिल्प योजना में वे प्रसाद की भाँति सिद्धहस्त हैं ।

‘ अन्तःपुर का आरम्भ ‘ और ‘ रमणी का रहस्य ‘ जैसी कहानियों में यह बात स्पष्टतः देखी जा सकती है । ” रायकृष्ण दास की कहानियों में भारतीय जीवन के सामाजिक व्यंग्य एवं सरसता- दोनों समान रूप से विद्यमान हैं । भावुक लेखक होने के नाते शिल्प में कथ्य और कलात्मक रचना की अपेक्षा आदर्श और यथार्थ के संघर्ष की अच्छी झाँकियाँ विद्यमान हैं ।

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एक कहानीकार के रूप में रायकृष्ण दास

रायकृष्ण दास जीवनी : एक कहानीकार के रूप में रायकृष्ण दास नितान्त रागात्मक अनुभूति और मूलतः आदर्शवादी दृष्टि वाले रचनाकार हैं . रायकृष्ण दास ने गद्य – गीतों की भी रचना की । ‘ प्रवाल ‘ उनका गद्य – गीत संग्रह है । गद्य गीतों में दृष्टिगोचर भावुकता इनकी शैली की एक सजीव एवं सप्राण प्रतीक वन गई है । इनके गद्य – गीतों के बारे में उचित ही कहा गया है कि “ छायावादी रागात्मकता इनके गद्य – गीतों की जान है ।

मानवीय भावनाओं का भावुक एवं कोमल पक्ष आपकी रचनाओं में विशेष रूप से चित्रित हुआ है । गद्य गीतकारों में माखनलाल चतुर्वेदी के साथ यदि अन्य किसी का भी नाम लिया जा सकता है , तो वह है रायकृष्ण दास का ।

Raikrishna Das biography in hindi  : ” कला मर्मज्ञ रायकृष्ण दास भारतीय कला को रायकृष्ण दास की जो देन है , उसका सम्यक मूल्यांकन होना अभी शेष है . रायकृष्ण दास को निकट से देखने – समझने वाली डॉ . कपिला वात्स्यायन का कथन है । विशेष रूप से लघु चित्रों के सौन्दर्य का आकलन करने वाले जानते हैं कि सन् 1896 से सन् 1908 तक की अवधि में कलकत्ता स्थित राजकीय कला कि चित्रकला के पारखी , विद्यालय के प्राचार्य ई . वी . हावेल भारतीय चित्रकला में निहित सौंन्दर्य की मनमानी व्याख्या कर रहे थे ।

रायकृष्ण दास ने इसी नाजुक मोड़ पर लघु चित्रों का संग्रह कर उन्हें भारतीय संदर्भ में हुए एक विशेष प्रकार की संज्ञा दी . ‘ भारत कला भवन ‘ में उनके द्वारा पाँच हजार लघु चित्रों का संग्रह , कला संग्रह के क्षेत्र में उनके विशेष योगदान का साक्षी है । परखते रायकृष्ण दास अत्यधिक सूक्ष्म और विरल सौन्दर्यशास्त्री थे । वे सही मायने में आधुनिक भी थे । प्रयोगवाद को सबसे पहले रायकृष्ण दास ने स्वीकारा और सराहा भी ।

Raikrishna Das biography in hindi  : ‘ भारत की मूर्तिकला ‘ एवं ‘ भारतीय चित्रकला ‘ रायकृष्ण दास की ये दो पुस्तकें भारतीय कला केबीजग्रन्थ ‘ माने जाते हैं । इनको पढ़ने से भारत की कला प्रतिभा को समझने में काफी सहायता मिलती है . ‘ भारतीय चित्रकला का इतिहास ‘ एक सशक्त रचना व चित्रकला के इतिहास को बताने वाला अनूठा ग्रन्थ है ।

भारत कला भवन

‘ भारत कला भवन ‘ रायकृष्ण दास की कला साधना की सम्पूर्ण उपलब्धि का प्रतीक है । इसके नए भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री पं . जवाहरलाल नेहरू ने किया था । वे इसके कलात्मक सौन्दर्य बोध से अभिभूत थे । ‘ भारत कला भवन ‘ के लिए रायकृष्ण दास ने जाने कहाँ कहाँ से और किन – किनसे भारतीय चित्रकला और मूर्तिकला की उत्तम से उत्तम कलाकृतियाँ संगृहीत कीं ।

अपने संग्रह को विशेष बनाने के लिए उन्होंने हर युक्ति से काम लिया और जितनी चातुरी से उन्होंने यह सब संग्रह किया , उससे कहीं अधिक उदारता से उन्होंने यह संग्रह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय को दान में दे दिया । एक कला मर्मज्ञ के रूप में राय साहब केवल संग्रहकर्ता ही नहीं थे । वे कला और कलाकार को पहचानने वाले भी थे । उन्होंने अपने समय के कलाकारों को प्रेरित कर कला जगत् में सम्मान दिलाया ।

उनकी कलाकृतियों को पहचाना , प्राप्त किया और उन्हें प्रतिष्ठा दी । ‘ भारत कला भवन ‘ में कलाकृतियों के अलावा रायकृष्ण दास ने अपने समय के प्रसिद्ध साहित्यकारों की हस्तलिखित पाण्डुलिपियों का भी संग्रह किया . भारतेन्दु हरिश्चन्द , जयशंकर प्रसाद , मैथिलीशरण गुप्त , वासुदेव शरण अग्रवाल , आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी आदि अनेक साहित्यकारों की पाण्डुलिपियों के नमूने , पत्रादि को राय साहब ने अपने कला संग्रह में सँजोया है ।

गुणग्राही और पारखी व्यक्तित्व

रायकृष्ण दास की दृष्टि गुणग्राही थी । उन्हें उत्कृष्ट और घटिया का भेद करना खूब आता था । उनमें यह विशेषता प्रकृतिदत्त थी । उनकी आँखें ऐसी सधी हुई थीं कि चाहे चित्र हो , रत्न हो या प्राकृतिक दृश्य , उसकी सूक्ष्म – से – सूक्ष्म विशेषता को वे एक ही बार में पकड़ लेते थे । रत्नों के वह कुशल पारखी थे । दुर्लभ – से – दुर्लभ रत्नों के बारे में उनकी जानकारी देखकर लोगों को आश्चर्य होता था ।

Raikrishna Das biography in hindi  : इस तरह रायकृष्ण दास सही अर्थों में बहुआयामी व्यक्तित्व वाले एक सम्पूर्ण कलाकार थे । उनके व्यक्तित्व के सम्बन्ध में यह कथन कितना महत्वपूर्ण है ” रायकृष्ण दासजी से जो लोग थोड़े समय के लिए भी जुड़े होंगे , उनके ऊपर उनके स्नेही और सजग व्यक्तित्व की गहरी छाप होगी । ऐसे ही व्यक्तियों को पाकर रचना प्रतिष्ठित होती है और प्रतिष्ठित होकर समाज को प्रतिष्ठा देती है ।

Raikrishna Das biography in hindi  :  उनको बहुत सम्मान मिला , प विश्वास मिला , उतना शायद ही किसी एक व्यक्ति को मिला हो । उसका कारण यह था कि विभूषण से भी अलंकृत किया गया , पर उनको साहित्यकारों और कलाकारों का जितना अट अपने अहंकार को इस तरह कला की साधना में विसर्जित करने वाले व्यक्ति शताब्दी में बस अपने को व्यक्त किया , उससे अधिक एक सम्पूर्ण जीवन की रचना में और उस रचना के दो – तीन ही हुए हैं ।

Raikrishna Das biography in hindi  : ऐसे लोगों में स्व . रायकृष्ण दास अप्रतिम थे . उन्होंने जितने अक्षरों में लिए आजीवन बेचैनी में अपने को अभिव्यक्त किया है . यह अभिव्यक्ति ही अमरत्व है . इस अमरत्व को प्रणाम । “

रायकृष्ण दास को किन भाषा का ज्ञान था?

हिन्दी, बंगला, गुजराती, उर्दू, आदि

साधना के रचनाकार कौन है?

रायकृष्ण दास

रायकृष्ण दास के प्रमुख नाटक के नाम बताये।

दुःखिनी बाला ‘, ‘पद्मावती ‘ तथा ‘महाराणा प्रताप ‘

किस पुस्तकें को भारतीय कला के ‘ बीजग्रन्थ ‘ माना जाता हैं ?

भारत की मूर्तिकला ‘ एवं ‘ भारतीय चित्रकला