Narendra Sharma in Hindi
Narendra Sharma in Hindi


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नरेन्द्र शर्मा जीवन परिचय

Narendra Sharma in Hindi : पं . नरेन्द्र शर्मा बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व के धनी हिन्दी साहित्यकार पं . नरेन्द्र शर्मा 11 फरवरी , 1989 को यकायक अस्वस्थ हो गए तथा उसी रात के साढ़े नौ बजे 77 वर्ष की आयु में उनका निधन भी हो गया । पं . नरेन्द्र शर्मा मिष्टभाषी , विनम्र एवं साहित्यिक राजनीति से दूर रहने वाले हिन्दी के सेवक – साधक थे । वह स्वतंत्रता सेनानी थे और पं . जवाहरलाल नेहरू के निकट सहयोगियों में इने – गिने व्यक्तियों में गिने जाते थे ।

Pandit Narendra Sharma biography : वह पाँच वर्षों तक पं . नेहरू के निजी सचिव भी रहे थे । हिन्दी साहित्य के क्षेत्र में पं . नरेन्द्र शर्मा का आगमन छायावाद के युग में हुआ और वह परवर्ती युग प्रगतिवाद के प्रमुख कवि बन गए । प्रगतिवाद की कविताओं में उनका स्वर मुखर है । उनके कविता संग्रह ‘ प्रभात फेरी ‘ और ‘ पलाशवन ‘ को प्रगतिवाद के प्रतिनिधि काव्य संग्रह कहा जा सकता है ।

नरेन्द्र शर्मा जीवन परिचय चार्ट

नामपंडित नरेंद्र शर्मा
जन्म 28 फरवरी 1913
जन्म स्थानजहाँगीरपुर , आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत
मृत्यु स्थान(उम्र 75) बॉम्बे , महाराष्ट्र , भारत
मृत्यु 12 फरवरी 1989
कार्य कवि, गीतकार
कार्यकाल1913-1989
शिक्षाइलाहाबाद विश्वविद्यालय
फिल्मआँधियाँ, नरसिंह अवतार
कविताएँकहानी कहते कहते ,पनिहारिन ,रथवानी ,स्वागतम
सम्मानपद्म भूषण
भाषाहिन्दी
Pandit Narendra Sharma biography

नरेन्द्र शर्मा जन्म कब और कहाँ हुआ?

Narendra Sharma in Hindi (जन्म): जन्म – श्री नरेन्द्र शर्मा का जन्म एक सम्पन्न ब्राह्मण परिवार में 28 फरवरी , 1913 को जिला बुलंदशहर की खुर्जा तहसील के ग्राम जहाँगीरपुर में हुआ था। शैशवावस्था में ही आपको पिता का वियोग सहन करना पड़ा , परन्तु परिवार के अन्य सदस्यों ने वालक नरेन्द्र को पूर्ण स्नेह प्रदान किया । शिक्षा – खुर्जा में इण्टरमीडिएट तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद आपने प्रयाग विश्व विद्यालय , प्रयाग में प्रवेश लिया और वहाँ से सन् 1936 में एम.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण की । पहुंचने पर उन्हें अपनी रुचि के अनुकूल वातावरण , प्रोत्साहन एवं सहयोग प्राप्त हुए ।

वहाँ अपने विद्या सम्पन्न परिवार में नरेन्द्रजी को शिक्षा के श्रेष्ठ संस्कार प्राप्त हुए । प्रयाग उनका सम्पर्क कवि बच्चन , सुमित्रानन्दन पंत , शमशेर बहादुर सिंह , केदारनाथ अग्रवाल , वीरेश्वर सिंह आदि से हुआ । काव्य – साधना- प्रयाग में रहते हुए लगभग 20 वर्ष की अवस्था में नरेन्द्र शर्मा काव्य रचना करने लगे थे । उनकी कोमल प्राण कविताओं को देखकर महाप्राण कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘ निराला ‘ इन्हें पंत परम्परा के प्रतिनिधि कवि के रूप में मान्यता प्रदान कर चुके थे।

Narendra Sharma in Hindi : प्रसिद्ध उपन्यासकार भगवती चरण वर्मा से भी इन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन प्राप्त हुआ था। ” आज नरेन्द्र शर्मा ने कविता , गद्य और नाटक की कुल मिलाकर उन्नीस पुस्तकें लिखी। न जाने कब मिलेंगे ” आदि कविताओं ने नरेन्द्र शर्मा को लोकप्रियता प्रदान की .। पं . किशोर नरेन्द्र के हृदय पर आर्य समाज के सुधारवादी आन्दोलन और राष्ट्रीय जागरण का व्यापक प्रभाव पड़ा ।

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नरेन्द्र शर्मा का देश प्रेम और प्रथम कविता प्रकाशित कार्य

Pandit Narendra Sharma biography : महात्मा गांधी के असहयोग आन्दोलन से प्रभावित होकर किशोर नरेन्द्र शर्मा एक बार पुलिस चौकी को ललकारने पहुंच गए थे । निर्भयता और देशभक्ति के भाव नरेन्द्र शर्मा में कूट – कूट कर भरे हुए थे । सन् 1942 में होने वाले ‘ भारत छोड़ो ‘ आन्दोलन में भाग लेने के कारण नरेन्द्र शर्मा को नजरबद करके देवली कैम्प में रखा गया । जेल – जीवन में ही प्रकृति की कोमलता और उसके सौन्दर्य से अनुप्राणित होकर आपने एक कथा गीति ‘ कामिनी ‘ की रचना की ।

Narendra Sharma in Hindi : ‘ मिट्टी और फूल ‘ कविता संग्रह की अधिकांश कविताएँ भी जेल जीवन में ही लिखी गई थीं । जिन दिनों आप जेल गए थे , उस समय नरेन्द्र शर्मा काशी विद्यापीठ में अध्यापन कार्य कर रहे थे । इसके पहले आप कुछ समय तक लीडर प्रेस से प्रकाशित ‘ भारत ‘ के सम्पादन विभाग से सम्बद्ध रहे थे ।

Narendra Sharma in Hindi : इनका प्रथम कविता संग्रहशूल – फूल ‘ सन् 1934 में प्रकाशित हुआ । उसके बाद सन् 1936 में ‘ कर्णफूल ‘ , सन् 1939 में प्रवासी के गीत ‘ और सन् 1940 में इनको प्रसिद्धि दिलाने वाला कविता संग्रह ‘ पलाश वन ‘ प्रकाशित हुआ । सन् 1943 में कवि नरेन्द्र शर्मा फिल्मों के लिए गीत लिखने के लिए बम्बई गए और वही वह गृहस्थ बने ।

नरेन्द्र शर्मा जीवन परिचय : सन् 1947 में ‘ हंसमाला ‘ , सन् 1948 में रक्त चन्दन ‘ , सन् 1950 में ‘ अग्निशस्य ‘ , सन् 1953 में ‘ कद्रलीवन ‘ , सन् 1960 में ‘ द्रोपदी ‘ , सन् 1964 में ‘ प्यासा निर्झर , सन् 1965 में ‘ उत्तरजय ‘ तथा सन् 1967 में ‘ बहुत रात गए ‘ काव्य – कृतियाँ प्रकाश में आई ।

नरेन्द्र शर्मा का द्रोपदी ‘ खण्ड काव्य

Pandit Narendra Sharma biography : बम्बई प्रवास में आप आकाशवाणी के सम्पर्क में आए , वहाँ सुगम संगीत तथा हिन्दी कार्यक्रमों के नियोजक और बाद में विविध भारती के संचालक रहे । कहने की आवश्यकता नहीं है कि काव्य संग्रहों में कवि नरेन्द्र शर्मा की वाणी और उनके विचारों में उत्तरोत्तर प्रौढ़ता आती गई । आकाशवाणी के दिल्ली केन्द्र पर कार्यरत् रहते हुए नरेन्द्र शर्मा ने ‘ द्रोपदी ‘ खण्ड काव्य की रचना की थी । ‘ द्रोपदी ‘ उनका प्रतीकात्मक काव्य है ।

Pandit Narendra Sharma biography : इस रचना में कवि की प्रौढ़ चिन्तन धारा मुखर हो उठी है । द्रोपदी की भूमिका में कवि का यह कथन द्रष्टव्य है कथा का आरम्भ द्रोपदी स्वयंवर से होता है , “ द्रोपदी जीवनी शक्ति साँप दी गई पाँछा तत्वों को , या कहा नियति ने , पार्थ ! करो अब प्राप्त लुप्त सत्वों को । ” मैंने द्रोपदी को पाँच महातत्वों को संश्लिष्ट और तेजोमय कर देने वाली जीवनी शक्ति के रूप में देखा है ।

द्रोपदी स्वयंवर के फलस्वरूप , जीवनी शक्ति द्रोपदी की प्राप्ति से पाँच पाण्डवों के रूप में पांच महातत्व अपना संश्लिष्ट स्वरूप प्राप्त करते हैं और प्राप्त करते हैं अपने को . द्रोपदी स्वयंवर से पहले , जो क्षत्रिय होकर भी ब्राह्मण – वेष में भिक्षाटन करते थे , द्रोपदी के संयोग से वे स्वधर्म और पैतृक राज्य को पुनः प्राप्त कर लेते हैं .

Narendra Sharma in Hindi:  श्रीकृष्ण को यज्ञपुरुष नारायण कहा जाता है । द्रोपदी यज्ञकुण्ड से पैदा हुई थी , इसीलिए श्रीकृष्ण और द्रोपदी का भाई बहन का अन्तरंग सम्बन्ध है । द्रोपदी को नारायणी शक्ति कहा गया है । पाण्डव अपने संश्लिष्ट स्वरूप में शक्तिमान नर हैं जिन्हें नारायणी शक्ति का प्रेरक संयोग प्राप्त होता है । पाठक स्मरण रखें कि द्रोपदी स्वयंवर के अवसर पर ही श्रीकृष्ण से पाण्डवों का मिलन होता है ।

नरेन्द्र शर्मा का फिल्मी दुनिया में प्रवेश

Pandit Narendra Sharma biography : गीतकार के रूप में – पं . नरेन्द्र शर्मा के काव्य संग्रह ‘ प्रवासी के गीत ‘ और ‘ पलाशवन ‘ के अनेक गीतों के रिकॉर्ड बने जो काफी लोकप्रिय हुए । दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों ने संगीतबद्ध किया था । का उद्घाटन गीत ‘ शुभ स्वागतम् ‘ आपने ही लिखा था । इस स्वागत गीत को पंडित रविशंकर पं . नरेन्द्र शर्मा ने साहित्यिक गीतों के अलावा सैकड़ों हिन्दी फिल्मी गीत लिखे ।

Pandit Narendra Sharma biography : इनमें अनेक गीत स्वर- साम्राज्ञी लता मंगेशकर द्वारा गाए गए , इन्हें संगीत प्रेमी कभी नहीं भुला जैसे गीत सकेंगे । ‘ भाभी की चूड़ियाँ ‘ फिल्म के गीत ज्योति कलश छलके , जो समर में हो गए अमर प्रमुख हैं । इसी फिल्म का एक अन्य गीत ‘ लौ लगाती गीत गाती ‘ तथा एक अन्य फिल्म का ‘ नैन दीवाने , इक नहीं माने , करे मनमानी सजना ‘ गीत भी अत्यन्त लोकप्रिय हुए ।

‘ नाच मन मयूरा , खोल के सहस्त्र नयन ‘ , ‘ वही खिली है विजन नयन में चंचल चारु चमेली ‘ आदि अनेक गीत ऐसे हैं , जिन्हें भुलाना बहुत कठिन है । जिस समय भाभी की चूड़ियाँ ‘ फिल्म बनी थी , उन दिनों फिल्मी गीतों में उर्दू के शब्दों का बोलबाला था । ऐसे समय में साहित्यिक गीत लिखकर नरेन्द्र शर्मा ने साहस का परिचय ही नहीं दिया , बल्कि हिन्दी के प्रति अपनी निष्ठा और सिद्धान्त के साथ समझौता न करने की नरेन्द्र शर्मा के गीत वस्तुतः फिल्मी गीतों की श्रेष्ठता की पहचान हैं ।

नरेन्द्र शर्मा जी के गीतों की विशेषता

Pandit Narendra Sharma biography : अपनी प्रवृत्ति को भी उजागर किया  इस संदर्भ में ‘ जागरण ‘ में प्रकाशित ये पंक्तियाँ दृष्टव्य हैं- ” पाँचवें दशक के बाद हिन्दी फिल्मों के के स्तर में गिरावट शुरू हो गई थी । पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव और पैसा कमाने की होड़ में कई फिल्मी गीतकारों ने महज तुकबंदियों को गीत के नाम पर पेश करके एक घटिया परम्परा डाली । इसके बावजूद कुछ गीतकार ऐसे भी रहे जिन्होंने सामाजिक दायित्व के प्रति जागरूक पं . नरेन्द्र शर्मा ऐसे ही फिल्मी गीतकार थे ।

” रहते हुए फिल्मी गीतों के सौन्दर्य और स्तर को बरकरार रखने के लिए लगातार कोशिश की । पंडित नरेन्द्र शर्मा के गीतों में हमें प्राकृतिक सौन्दर्य , देशभक्ति तथा भारतीय संस्कृति की गौरवपूर्ण झलक व्याप्त दिखाई देती है ।

सत्यम् शिवम् सुन्दरम् फिल्म में उन्होंने निम्नलिखित गीत में बहुत ही सरल , सीधे और सुरुचिपूर्ण शब्दों में एकता का संदेश दिया एक सूर्य है , एक गगन है एक ही धरती माता दया करो प्रभु एक बनें सब , सबका एक से नाता ।।

इसी फिल्म का यह प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय गीत भी पं . नरेन्द्र शर्मा ने ही लिखा था शोमत मैया से बोले नन्दलाला ” । फिल्मी गीतों के सम्बन्ध में उनका कहना था कि फिल्म कृषि की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है , जिसका रचनात्मक उपयोग करते हुए फिल्म गीतकारों को जनसाधारण के लिए सुरुचिपूर्ण गीत लिखने चाहिए ।

” आज के व्यावसायिक फिल्म गीतकार यदि नरेन्द्र शर्मा के इस दृष्टिकोण को अपना सकें , तो हिन्दी फिल्मों के गीतों का स्तर शीघ्र ही उठ जाए । इस संदर्भ में यह निवेदन कर देना आवश्यक प्रतीत होता है कि पंडित नरेन्द्र शर्मा ने फिल्मों में व्यावसायिक रूप से जमने के लिए गीतों के स्तर के सम्बन्ध में कभी समझौता नहीं किया , इसीलिए आरम्भ में इन्हें गीत लिखने का अधिक अवसर नहीं मिला । साथ ही जो फिल्में मिलीं , उन्होंने दर्शकों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी ।

नरेन्द्र शर्मा की प्रतिभा बहुमुखी थी । वह आकाशवाणी में ‘ विविध भारती ‘ कार्यक्रम के प्रथम निदेशक नियुक्त हुए थे । चुने हुए फिल्मी गीतों के कार्यक्रम ‘ छायागीत ‘ व ‘ चित्रहार ‘ तथा हास्य नाटिका में मनोरंजन करने वाले कार्यक्रम ‘ हवामहल ‘ का शुभारम्भ श्री नरेन्द्र शर्मा ने ही किया था । धूम मचाने वाले दूरदर्शन धारावाहिक ‘ महाभारत ‘ की पटकथा आपने ही लिखी । इसके गीतों की रचना आपने की तथा इस धारावाहिक की परिकल्पना भी आपने ही की ।

निष्कर्ष

Pandit Narendra Sharma biography : आपने इसके लिए शोधकार्य भी किया । पं . नरेन्द्र शर्मा वस्तुतः बहुश्रुत विद्वान् थे । ज्योतिषशास्त्र एवं आयुर्वेद का उन्हें अच्छा ज्ञान था ।  उनके साठवें जन्मदिवस के अवसर पर पं . नरेन्द्र शर्मा के प्रशंसकों ने उनके सम्मान में एक ग्रन्थ प्रकाशित किया था- ‘ ज्योति कलश छलके ‘ इसमें प्रकाशित रचनाओं में उनके बहुआयामी व्यक्तित्व एवं उनकी बहुमुखी प्रतिभा का सफल उद्घाटन किया गया है । महत्व – पं . नरेन्द्र शर्मा हिन्दी कविता की छायावादोत्तर पीढ़ी के अर्थात् प्रगतिवाद के प्रमुख कवि थे।

Pandit Narendra Sharma biography : वह काव्य – कला के मर्मज्ञ , छंदों के प्रयोग में प्रवीण एवं चलते – फिरते ज्ञान के भण्डार थे । वह व्यवहार कुशल भी थे तथा व्यावहारिक भी थे । नरेन्द्र शर्मा अपनी मान्यताओं के साथ किसी भी मूल्य पर समझौता करना नहीं जानते थे । वह व्यक्ति मात्र के लिए , जन – मानस के लिए लिखते थे ।

व्यक्ति के नाम पर उन्होंने केवल निरालाजी पर एक कविता लिखी है । उनकी उत्तरकालीन रचनाओं में उनका आस्थावान् एवं संस्कृति के उपासक का रूप उभर कर आया है । उनकी इन रचनाओं में उनकी सौम्यता की छाप गहरा गई है । पं . नरेन्द्र शर्मा के रूप में हिन्दी के प्रमुख प्रगतिवादी गीतकार , कवि एवं फिल्मी गीतों को संस्कार प्रदान करने वाले एक कुशल कलाकार को खो दिया है ।

नरेंद्र शर्मा की कविताएं बताये!

Kahani Kehte Kehte
पनिहारिन
रथवानी
स्वागतम

नरेन्द्र शर्मा की रचनाएँ

कर्णफूल, संग्रह ‘ शूल – फूल ‘ , मिट्टी और फूल आदि

लता मंगेशकर किन्हें आपन पिता के रूप में मानती थी?

नरेन्द्र शर्मा

नरेन्द्र शर्मा का प्रथम कविता का नाम बताये।

इनका प्रथम कविता संग्रहशूल – फूल ‘ सन् 1934 में प्रकाशित हुआ ।