jyotirao phule in hindi
jyotirao phule in hindi

jyotirao phule in hindi, jyotiba phule ka jivan parichay महात्मा ज्योतिबा फुले के गुरु कौन थे ,ज्योतिबा फुले की पत्नी का क्या नाम था,ज्योतिबा फुले का शिक्षा में योगदान,ज्योतिबा फुले की मृत्यु कब हुई,ज्योतिबा फुले के अनमोल विचार,biography of jyotiba phule in hindi,jyotiba phule kaun thi,jyotiba phule ka jivan parichay,Mahatma Jyotirao Phule

jyotirao phule in hindi


jyotirao phule in hindi : उन्नीसवीं शताब्दी के समाज सुधारकों के सामने ज्वलंत समस्याएँ मुँह वहाए खड़ी थीं । रूढ़िग्रस्त व अंधविश्वासों से जकड़ा हिन्दू समाज दीर्घकालीन दासता के परिणामस्वरूप अंग्रेजी आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधानों के समक्ष पूर्णतः पिछड़ा हुआ था।
विशेषकर तीन प्रश्नचिह्न मुँह चिढ़ाने लगते थे—
( 1 ) रूढ़ियाँ और अंधविश्वास ,
( 2 ) ईसाई मिशनरीज द्वारा तीखे प्रहार व निंदा तथा
( 3 ) अंग्रेजी मानसिकता से नास्तिकता की अभिवृद्धि ,

indira Gandhi biography

jyotiba phule ka jivan parichay : विचारणीय स्थिति


jyotirao phule in hindi : विचारणीय स्थिति यह थी कि जिस धर्म में ब्राह्मण , राजपूत , कायस्थ , कुरमी अछूत मात्र रहकर मनुष्य , मनुष्य न रह गया हो । एक जाति दूसरी जाति के विद्वान् को मूर्ख , सच्चरित्र को दुश्चरित्र , सवल को दुर्बल और इसके विपरीत अपनी जाति के मूर्ख को विद्वान् और पापी को पुण्यात्मा समझती हो । 

उस देश और समाज की समृद्धि व स्वतंत्रता का ह्रास होना निश्चित था । ऐसी ही सामाजिक कुरीतियों और पाखण्डों से भरी मान्यताओं के विरुद्ध राजा राममोहन राय , गोपाल कृष्ण गोखले , महादेव गोविंद रानाडे , केशवचन्द्र , प्रोफेसर कर्वे , दयानन्द सरस्वती , लोकमान्य तिलक आदि महापुरुषों की श्रृंखला में महाराष्ट्र के समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले का नाम भी दीप्तिमान है।

उनके समय में जड़ मूर्तिपूजा लेकर छूआछूत , जाति – पाँति की ऊँच – नीच की भावनाएँ , नारी वर्ग के प्रति अमानवीय व्यवहार , बाल – विधवाओं के प्रति क्रूर दमनचक्र आदि पशुवत प्रथाएँ प्रचलित थीं । दलित और शूद्रों के लिए साँस लेना तक दूभर था । बाल – विधवाएँ निरीह बेजुबान मृगछौने की तरह कष्ट साध्य जीवन का भार ढो रही थीं । सम्पन्न सवर्ण धनाढ्य लोगों द्वारा प्रताड़ित करके उनका खुलेआम यौन – शोषण होना सामान्य बात थी ।

दुर्भाग्यवश विधवा होना अभिशाप बन गया था । विधवा होते ही उसकी केशराशि का मुण्डन इस बेदर्दी से कराया जाता था कि उसकी खोपड़ी की चमड़ी खून से रंग जाती थी । फिर उसे जीवनभर न तो कभी भर पेट भोजन दिया जाता था और न वह किसी विवाह अथवा मंगल अवसर पर अपनी छाया तक दिखा सकती थी ।

पूरी जिन्दगी सफेद सूती धोती में गुजार देना ही उनकी नियति बन गई थी । शूद्र और नारी दोनों के लिए विद्यार्जन करना प्रतिबन्धित था । शिक्षण संस्थाओं के अतिरिक्त कुओं से पानी लेना तक वर्जित था । मन्दिरों के कपाट उनके लिए बंद थे। इन सब मानवीय अधिकारों से वंचित इस दलित वर्ग को उच्च वर्ण वालों की सेवा में रात – दिन प्राणपण से जीवनपर्यंन्त जुटे रहकर ही पेट भरने के लिए आवश्यक था ।

jyotirao phule in hindi

महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म कब और कहाँ हुआ?

jyotirao phule in hindi : ऐसी ही विषम परिस्थितियों में 28 अप्रैल , 1827 में पूना के एक पिछड़े क्षेत्र में गोविंदराव के घर ज्योतिराव फुले का जन्म हुआ । होश संभालते ही ज्योतिराव फुले ने भारत में फैली इन धार्मिक कुरीतियों , मिथ्याचारों छुआछूत , पाखण्ड , ढकोसलों व अस्पृश्यता जैसी दकियानूसी परम्पराओं पर गम्भीरता से सोच – विचार किया । अपने से पूर्व समाज सुधारकों के विचारों को गहराई से समझा और खासतौर से मिथ्याडम्बरोंपाखण्डों पर आश्रित ब्राह्मणों के विरुद्ध विद्रोह का बिगुल फूँक दिया ।

ज्योतिराव फुले के वचपन में कुछ ऐसी घटनाएँ घटी थीं जिसके कारण वह यह सोचने पर विवश हो गए कि देश के असंख्यों शूद्र – दलित लोगों के साथ ईश्वर अथवा धर्म का नाम लेकर पशुता का व्यवहार क्यों किया जाता है ? नारी की कोख से जन्म लेते ही बच्चे को ब्राह्मण और शूद्र की श्रेणी में वर्गीकरण करने का औचित्य क्या है ?

किस आधार से पैदा होते ही बालक हिन्दू , मुसलमान , सिख , ईसाई हो जाता है , जबकि न तो उसे धर्म का ज्ञान होता है और न उसके प्रति कोई आस्था ? ऐसे ही तमाम प्रश्नों में उनके हृदय में मनुस्मृति , वेद , पुराण , महाभारत , रामायण , गीता आदि धर्म ग्रन्थों के प्रति आशंकाओं को उत्पन्न किया . कर्मकाण्डी पाखण्डों के लिए ब्राह्मण वर्ग के प्रति वे घृणा से आक्रोशित हो उठे ।

ज्योतिबा फुले के सामाजिक विचार


jyotirao phule in hindi : बचपन में अपने ब्राह्मण मित्र की बारात में जाकर उन्हें जिस प्रकार अपमानित होना पड़ा । उसकी अमिट छाप वह जीवनपर्यंन्त महसूस करते रहे । दलित समाज की जातिगत यातनाओं व असहाय नारियों के प्रति अनाचार की पराकाष्ठा से उनका हृदय कराह उठा । न्यायमूर्ति महादेव गोविंद रानाडे की पत्नी रमाबाई के संस्मरणों से विदित होता है कि स्त्री शिक्षा की बात को लेकर कैसे झमेले उठ खड़े होते थे ?

रानाडे की दादी को 12 वर्ष तक गाय के मूत्र में आटा सान कर रोटी खाने के लिए इसलिए विवश होना पड़ा कि उनके बच् जीवित बच सकें पेशवा शासनकाल में ब्राह्मण स्त्री के हाथ का हुआ पानी तक नहीं पीते थे । अल्पायु बालिकाओं की बेमेल शादियाँ , वृद्ध पुरुषों से होती थीं और पति की मृत्यु होने पर उन्हें सती होने को विवश किया जाता था ।

महात्मा ज्योतिराव फुले को दलित – शोषित वर्ग तथा निरीह बेसहारा नारियों के हृदय में चेतना जाग्रत करने के लिए यदि आधुनिक भारत के इतिहास में प्रथम भारतीय कहा जाए , तो अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

jyotiba phule ka jivan parichay

नाममहात्मा ज्योतिबा फुले
जन्म 28 अप्रैल , 1827
जन्म स्थानपूना के गोविंदराव के घर
धर्मपत्नीसावित्री बाई
मृत्यु28 नवम्बर , 1890
jyotirao phule in hindi

ज्योतिबा फुले का शिक्षा में योगदान : jyotirao phule in hindi

jyotirao phule in hindi : सन् 1848 में महात्मा फुले ने अछूत वर्ग के लिए पहली पाठशाला स्थापित की बालिकाओं के लिए कन्या विद्यालय खोलने वाले देश के वे ही सर्वप्रथम भारतीय समाज सुधारक थे । यह भी संयोग है कि उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सावित्री बाई ने ही प्रथम महिला अध्यापिका के रूप में साहस बटोरा ।

ऐसी विषम परिस्थितियों में उन्हें एक प्रबल विरोध का सामना करना पड़ा । उस अदम्य साहसी नारी ने निःसन्तान होने के कारण काशीबाई नामक विधवा नारी के पुत्र को सहर्ष गोद लेकर पाला – पोषा । यह विधवा किसी लम्पट की वासना का शिकार होकर आत्महत्या के लिए अग्रसारित थी , पर महात्मा फुले से ढाँढ़स व सहानुभूति पाकर वह उनके अनाथालय आश्रम में शरणागत थी ।

महात्मा फुले ने समाज की कुरीतियों के विरुद्ध व्यापक दृष्टिकोण अप और शोषितों की चेतना को जाग्रत करके उन्हें रचनात्मक कार्यों की ओर प्रेरित किया । अपने छोटे से घर ही अनाथ बच्चों व सताई हुई नारियों को आश्रय देकर अनाथालय की स्थापना करके उन्होंने अपनी क्रियान्वयन शक्ति का परिचय दिया । वे जातिवाद के कारण अन्याय का शिकार बने लोगों के अधिकारों के लिए जीवनपर्यन्त संघर्ष करते रहे।

ज्योतिबा फुले के अनमोल विचार : jyotirao phule in hindi


jyotirao phule in hindi : महात्मा फुले के विचार में जमीन जोतने वाला ही उस जमीन का स्वामी होना चाहिए था और गरीब मजदूर के गाढे पसीने की कमाई से फल – फूल रहे मिल – कारखानों के लाभ में से एक हिस्सा उन्हें दिए जाने के पूर्ण समर्थक थे । बम्बई के मिल मजदूरों को संगठित करके उनकी समस्याओं के समाधान ढूँढ़ निकालने में उनकी भूमिका सराहनीय रही । स्त्री मुक्ति के लिए कार्यारम्भ करने का श्रेय भी महात्मा फुले को जाता है । हिन्दू धर्म ग्रंथों में स्त्री जाति को नीच , अवला , दासी माने जाने की बात का उन्होंने प्रवल विरोध किया ।

पुराण हो या मनुस्मृति जहाँ भी नारी की स्वतंत्रता और मानवीय अधिकारों की भावनाओं पर अंकुश की बात आई , ज्योतिराव फुले ने उसकी उपेक्षा करते हुए कहा है कि यह पुरुषों द्वारा रचित धर्म ग्रंथ उनकी स्वार्थ लिप्सा के प्रतीक हैं । उनकी राय में स्त्री का स्वावलम्बी न होना ही उनके शोषित होने का मुख्य कारण था । घर की चारदीवारी में कैद करके नारी को भोग – दासी बनाए रखे जाने के विरुद्ध उन्होंने जबर्दस्त प्रतिरोध किया । वे विधवा विवाह के लिए नवयुवको को प्रोत्साहित करते थे । सती जैसी क्रूर प्रथा की उन्होंने भर्त्सना की और नारी – सम्मान के लिए लोगों को प्रेरित किया ।

“ जिस जमाने में महात्मा फुले ने स्त्रियों एवं शूद्रों में शिक्षा के प्रसार तथा अस्पृश्यता निवारण के लिए तीव्र संघर्ष किया । वह जमाना बहुत कठिन था । ऐसे कार्यों के लिए उस समय कहीं भी सहायता मिलना असम्भव थी । आज भारतीय लोकतंत्र में स्त्री , किसान , शोषित , दलित एवं मजदूरों का जैसे – जैसे उत्थान होगा । वैसे – वैसे इतिहास में महात्मा फुले का व्यक्तित्व अधिकाधिक उभरकर सामने आएगा ।

jyotirao phule in hindi : भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व . पं . जवाहरलाल नेहरू के जो उन्होंने बम्बई के ‘ फुले तांत्रिक माध्यमिक विद्यालय ‘ के उद्घाटन समारोह में महात्मा फुले की पुण्यतिथि के उपलक्ष में व्यक्त किए थे । नेता हुए उनमें हालांकि महाराष्ट्र में नवोत्थान के क्रम में उस समय जो समाज सुधारक रानाडे , गोखले और तिलक तो राष्ट्रीय धारा में जुड़ जाने से समस्त राष्ट्र में पहचाने जाने लगे । श्रीयुत आगरकर एवं महात्मा फुले केवल अपने प्रांत तक ही सीमित रह गए । फिर भी महाराष्ट्र के नवोत्थान के संक्रमणकाल में इन दोनों की समाज सुधार सेवाएँ सदैव स्मरणीय रहेंगी ।

ज्योतिबा फुले की मृत्यु कब हुई ?


jyotirao phule in hindi : 28 नवम्बर , 1890 को महात्मा फुले का देहावसान हुआ था और आज उस महान् समाज सुधारक की मृत्यु को 123 वर्ष होने जा रहे हैं । किन्तु कैसी विडम्बना है कि आज भी भारत में नारी शोषण , दहेज , जाति – पाँति और दलित उपेक्षा की कुरीतियाँ प्रचलित हैं । लेकिन इसमें भी सन्देह नहीं है कि अब यह कुरीतियाँ अधिक समय तक नहीं रह पाएंगी । आज का दलित और शोषित वर्ग अब जाग चुका है और निश्चय ही जिस दिन वह पूरी तरह जाग जाएगा , तभी उस कर्मयोगी महात्मा ज्योतिराव फुले की आत्मा को शान्ति प्राप्त होगी ।

jyotirao phule in hindi : निष्कर्ष


तो दोस्तो आज हमने jyotirao phule in hindi मे ज्योतिबा फुले जीवन परिचय को samjha। jyotirao phule in hindi हमारे महान समाज सुधारक के बारे में था। इस blog post से जुड़ी किसी भी प्रकार की question हो तो हमे comments जरूर करे।

सावित्री बाई ने किसका बच्चा गोद लिया था?

काशीबाई के पुत्र को सावित्री बाई ने सहर्ष गोद लिया था।

ज्योतिबा फुले की मृत्यु कब हुई

28 नवम्बर , 1890