homi j bhabha in hindi
homi j bhabha in hindi

homi j bhabha in hindi ,होमी जहाँगीर भाभा जीवन परिचय , homi j bhabha jiwan parichay, homi j bhabha biography, hj homi jehangir bhabha in hindi, essay on homi jehangir bhabha,doctor homi jehangir bhabha,doctor homi jehangir bhabha hindi mein,doctor homi jehangir bhabha death,doctor homi jehangir bhabha,Homi Jahangir Bhabha

homi j bhabha in hindi

होमी जहांगीर भाभा (1909-1966) एक भारतीय भौतिक विज्ञानी थे, जिन्हें परमाणु भौतिकी, विशेष रूप से परमाणु विखंडन के सिद्धांत पर उनके काम के लिए जाना जाता था। वह भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न के प्राप्तकर्ता थे। भाभा का जन्म 27 जनवरी 1919 को बॉम्बे (अब मुंबई) में एक पारसी परिवार में हुआ था। उन्होंने 1940 में एलफिंस्टन कॉलेज से स्नातक किया और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर), मुंबई में शामिल हो गए, जहां उनके गुरु इसिडोर एफ एस स्टोन थे।

होमी जहांगीर भाभा (1909-1966) एक भारतीय-अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और येल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। उन्हें कण भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान के अनुप्रयोगों के साथ क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत और क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत पर अपने शोध के लिए जाना जाता है।

उन्हें हैड्रॉन भौतिकी के सिद्धांत और भाभा डिवीजन पर उनके काम के लिए जाना जाता है, जो आधुनिक त्वरक डिजाइन का आधार है। उन्हें कण कोलाइडर में उनके काम के लिए भी जाना जाता है, जिसमें उन्होंने टी-चैनल की अवधारणा का प्रस्ताव रखा था, जो अब आमतौर पर लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) जैसे कोलाइडर में उपयोग किया जाता है।

होमी जे. भाभा एक भारतीय भौतिक विज्ञानी और येल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। उन्हें कण भौतिकी और ब्रह्मांड विज्ञान के अनुप्रयोगों के साथ क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत और क्वांटम क्षेत्र सिद्धांत पर अपने शोध के लिए जाना जाता है। उन्हें हैड्रॉन भौतिकी के सिद्धांत और भाभा डिवीजन पर उनके काम के लिए जाना जाता है,

जो आधुनिक त्वरक डिजाइन का आधार है। उन्हें कण कोलाइडर में उनके काम के लिए भी जाना जाता है, जिसमें उन्होंने टी-चैनल की अवधारणा का प्रस्ताव रखा था, जो अब आमतौर पर लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (एलएचसी) जैसे कोलाइडर में उपयोग किया जाता है।

doctor homi jehangir bhabha

विषयhomi j bhabha in hindi
नामडॉ . होमी जहाँगीर भाभा
जन्म30 अक्टूबर , 1909
जन्म स्थान बम्बई – धनवान् पारसी परिवार में
माता-पिताश्री जे.एच. भाभा
कामविज्ञानिक
मृत्यु24 फरवरी , सन् 1966
doctor homi jehangir bhabha hindi mein

होमी जहाँगीर भाभा जीवन परिचय



homi j bhabha in hindi : आधुनिक विश्व आज परमाणु युग में जी रहा है । यह मानव की निरन्तर परिवर्तनशील प्रकृति का द्योतक है , तभी तो हम पाषाण युग से लौह युग पार करते हुए परमाणु युग में आ गए हैं । स्वतन्त्र भारत को परमाणु युग में प्रवेश दिलाने का श्रेय महान् वैज्ञानिक डॉ . होमी जहाँगीर भाभा को ही जाता है ।

डॉ . भाभा एक ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने न केवल भारत में , अपितु विश्वभर में अपनी वैज्ञानिक क्षमता का परिचय दिया । डॉ . भाभा का जन्म बम्बई के एक पढ़े – लिखे धनवान् पारसी परिवार में 30 अक्टूबर , 1909 को हुआ ।

homi j bhabha in hindi : उनके पिता श्री जे.एच. भाभा बम्बई के सुप्रसिद्ध वैरिस्टरों में से एक थे ।

इन्हे भी पढ़े-

डॉ . भाभा की प्रारम्भिक शिक्षा

homi j bhabha in hindi : डॉ . भाभा की प्रारम्भिक शिक्षा बम्बई के केथेड्रल और जॉन कैनन हाईस्कूल में हुई । वे अपनी कक्षा के मेधावी छात्र थे , उनकी विशेष रुचि गणित में थी । पन्द्रह वर्ष की आयु में ही उन्होंने सीनियर केम्ब्रिज की परीक्षा उत्तीर्ण की । उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु , उनके पिता उन्हें यूरोप भेजने के इच्छुक थे , परन्तु उसकी आयु कम होने के कारण , यह संभव नहीं हो सका ।

homi j bhabha in hindi : इस कारण उन्हें स्थानीय एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश दिलाया गया , वहाँ भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया । उसके बाद रॉयल सोसायटी ऑफ साइंस में प्रवेश कराया गया । वहाँ अध्ययन करते हुए उन्होंने बम्बई विश्वविद्यालय की आई । एस . सी . की परीक्षा सम्मान पूर्वक उत्तीर्ण की । इसके बाद वे कैम्ब्रिज के गोनविल एंडकेयस कॉलेज में पढ़ने के लिए इंगलैण्ड चले गए ।

homi j bhabha in hindi : वहाँ उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय देते हुए इंजीनियरिंग की परीक्षा अच्छे अंकों से उत्तीर्ण की । डॉ . भाभा को इंजीनियरिंग के साथ – साथ गणित और भौतिक विज्ञान से भी अत्यधिक प्रेम था । उन्होंने इन विषयों का गहन अध्ययन किया तथा इन विषयों के उचित अध्ययन हेतु वे कैम्ब्रिज के केयस कॉलेज में सन् 1930 में प्रविष्ट हो गए । भौतिक विज्ञान से विशेष लगाव होने के कारण वे अपना ध्यान इसी में लगाए रखते थे ।

homi j bhabha in hindi :  डॉ . भाभा कॉस्मिक किरण की मौलिक खोजों के सम्बन्ध में भाषण देने का अवसर प्राप्त हुआ । उन्हें यूरोप के विभिन्न देशों में जाकर विद्युत् एव चुम्बकत्व से सम्बन्धित विषयों के अतिरिक्त नामक वैज्ञानिक के साथ कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ । इनके साथ रहते है अनेक देशों में भाषण देने के फलस्वरूप उनकी ख्याति फैलने लगी । इसी बीच हाइटर ने अनेक शोध कार्य किए ।

डॉ . होमी जहाँगीर भाभा की उपलब्धियां


homi j bhabha in hindi : सन् 1932 में उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज में उच्च गणित का अध्ययन करने के लिए छात्रवृत्ति मिल गई । डॉ . भाभा ने उच्च गणित के अध्ययन का कार्य समाप्त किया और 1934 से 1937 तक तीन वर्षों में भौतिक विज्ञान के सम्बन्ध में अनेक शोध कार्य किए ।

इसी बीच उन्होंने ‘ कॉस्मिक किरण की बौछार के क्रम प्रपात ( Cascade Theory of Cosmic Ray Showers ) सिद्धान्त का प्रतिपादन किया । इसके फलस्वरूप 1934 में उन्हें पी.एच – डी . की उपाधि से सम्मानित किया गया ।

homi j bhabha in hindi : इस प्रकार अपनी शिक्षा एवं अध्ययन समाप्त करके भारत लौटे , भारत लौटने पर भारतीय विज्ञान संस्थान , बंगलौर में वे 1941 में भौतिकी के प्राध्यापक नियुक्त किए गए । इसके बाद उन्हें कॉस्मिक किरण संशोधन केन्द्र में प्रोफेसर बनाया गया । जहाँ उन्होंने परिश्रम और लगन से तीन वर्षों तक कार्य किया ।

homi j bhabha in hindi : सन् 1941 में उन्हें रॉयल सोसायटी का फैलो बनाया गया , जिसके परिणामस्वरूप उन्हें लंदन जाना पड़ा । सन् 1942 में उन्हें कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एडम्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया । डॉ . भाभा ने विज्ञान में भौतिक अनुसंधान हेतु एक संस्थान का निर्माण करने के उद्देश्य से दोराबजी टाटा ट्रस्ट को एक पत्र लिखा ।

homi j bhabha in hindi : उनके अनुरोध पर दोराबजी टाटा ट्रस्ट द्वारा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेन्टल रिसर्च नामक संस्था की स्थापना की गई । जिसके वे प्रथम निदेशक बने । इस हेतु डॉ . भाभा ने बंगलौर छोड़ दिया और रिसर्च संस्थान के निदेशक होकर बम्बई आ गए । भारत की स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद सन् 1948 में परमाणु शक्ति आयोग की स्थापना की गई ।

homi j bhabha in hindi : डॉ . भाभा को इस आयोग का अध्यक्ष मनोनीत किया गया । डॉ . भाभा की अध्यक्षता में प्रथम परमाणु शक्ति से सम्बन्धित कार्य ट्रॉम्बे में अप्रैल , सन् 1955 में आरम्भ किया गया । ट्रॉम्बे का परमाणु शक्ति केन्द्र उनकी एक महान् कृति है ।

इस केन्द्र का उद्घाटन आधुनिक भारत के निर्माता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया । डॉ . भाभा ने अपने कार्यकाल में ‘ अप्सरा ‘ तथा ‘ जरलीना ‘ नामक परमाणु भट्टियों का निर्माण कराया । आज ट्रॉम्बे संस्थान में कई वैज्ञानिक कार्य करते हुए अपनी वैज्ञानिक क्षमता का उपयोग कर रहे हैं ।

डॉ . होमी जहाँगीर भाभा का अनेक प्रकार की रुचियाँ

homi j bhabha in hindi : डॉ . भाभा ने अपने जीवनकाल में अनेक विषयों पर शोध कार्य किए । वे वैज्ञानिक क्षमता के धनी तो थे ही , साथ ही वे कला – प्रेमी भी थे । डॉ . भाभा एक वैज्ञानिक होने के साथ – साथ संगीत प्रेमी तथा कला – प्रेमी भी थे । संगीत का शौक उन्हें बचपन से ही था । बचपन बीमारी का इलाज कराने पर भी वे ठीक नहीं हुए ।

homi j bhabha in hindi : अंत में एक उपाय काम में लाया गया में वे खूब रोया करते थे । उनके पिता को इस बात की बहुत चिन्ता रहती थी । उनकी इस उनका ध्यान बंट जाता था और उनका रोना बंद हो जाता था । इसी कारण वे धीरे – धीरे उनके सामने ग्रामोफोन बजाया जाने लगा । यह उपाय कारगर सिद्ध हुआ । ग्रामोफोन सुनकर गीत प्रेमी होते गए , अवकाश के क्षणों में वे अपना अधिकांश समय संगीत और चित्रकला नगा देते थे ।

डॉ . भाभा का मृत्यु कब और कैसे हुआ?


homi j bhabha in hindi :  डॉ . भाभा का जीवन सदा सादगीपूर्ण रहा । वे सदा दूसरों की सहायता करने को तत्पर भी इस दिशा में कार्य करने रहते थे । उनकी एकमात्र इच्छा विज्ञान क्षेत्र को विस्तृत करना था । उन्होंने अपने शिष्यों को सलाह दी ।

homi j bhabha in hindi : 24 फरवरी , सन् 1966 का दुर्भाग्यपूर्ण दिन डॉ . भाभा की इस दुनिया से विदाई का दिन था । जब वे विमान द्वारा बम्बई से जेनेवा जा रहे थे , तब ‘ कंचन जंघा ‘ नामक उक्त जेट विमान पश्चिमी यूरोप की सबसे ऊँची चोटी ‘ माउण्ट ब्लेक ‘ से टकराकर नष्ट हो गया और विज्ञान जगत् का यह देदीप्यमान नक्षत्र उस विमान के साथ ही सारे संसार से सदैव के लिए विलुप्त हो गया । डॉ . भाभा ने विज्ञान जगत् को जो अमूल्य भेंट दी है , उससे भावी वैज्ञानिकों को अपनी वैज्ञानिक क्षमता सिद्ध करने में काफी सहायता मिलेगी ।

भारत में अणुशक्ति का विकास किसने किया?

होमी जहाँगीर भाभा

होमी जहांगीर भाभा ने कौन से तीन नाभिकीय रिएक्टर की स्थापना की?

अप्सरा , सिरस और जरलीना

होमी जहांगीर भाभा की मृत्यु कैसे हुई?

विमान दूर्खटना के कारण