Hemant Mukherjee in hindi
Hemant Mukherjee in hindi

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हेमंत मुखर्जी जीवनी

Hemant Mukherjee in hindi : संगीत की दुनिया के बेताज बादशाह हेमन्त कुमार मुखर्जी , जिन्हें प्रेम से लोग ‘ हेमन्त दा ‘ भी कहते थे , के 26 सितम्बर , 1989 की रात्रि को दुनिया से उठ जाने के कारण संगीत का स्वर मन्द पड़ गया है । संगीत जिनके रोम – रोम में बसा था , जिनके गीतों में भारत की आत्मा और स्वरों में भारत की अस्मिता प्रतिबिम्बित होती थी , जिसके राग देशभक्ति की धुन अलापने में ही मस्त रहते थे । उनकी आवाज में मोहक जादुई आकर्षण था ।

Hemant Mukherjee in hindi : उनके कदम संगीत की लय पर ही पड़ते थे । उनके बारे में यह कहना कोई अतिशयोक्तिपूर्ण कथन नहीं होगा कि उनकी दिनचर्या तक संगीत से ओतप्रोत थी । अपने इन्हीं गुणों से उन्होंने लगभग चार दशक तक संगीत प्रेमियों के दिल पर राज किया । उनके मोहक संगीत पर देश की करोड़ों जनता मोहित थी । जिस तरह से हॉकी के जादूगर के रूप में ध्यानचन्द का नाम प्रसिद्ध है , वैसे ही संगीत के जादूगर के रूप में उनका नाम भी सदियों सदियों तक स्मरणीय रहेगा ।

हेमंत मुखर्जी जीवनी चार्ट

नामहेमंत मुखर्जी
जन्म16 जून , 1920
जन्म स्थानबनारस के एक बंगाली परिवार में
मृत्यु26 सितम्बर , 1989
परिवारहेमंत के तीन भाई और एक बहन नीलिमा थी
भाईउनके बड़े भाई, ताराज्योति,छोटे भाई, अमल मुखर्जी
पत्नीबेला मुखर्जी
बच्चेउनके दो बच्चे थे: एक बेटा, जयंत और एक बेटी, रानू।
शिक्षानसीरुद्दीन स्कूल और मित्रा इंस्टीट्यूशन
सम्मान1970: पद्म श्री (अस्वीकार) 1987: पद्म भूषण (अस्वीकार)
कार्यसंगीत निर्माता
योगदानशास्त्रीय गायिका
प्रथम गीत15 वर्ष की उम्र में गाये
आत्मकथाआनन्दधारा
कार्यकाल1937 to 1989
Hemant Mukherjee in hindi

हेमंत मुखर्जी का संगीत मे योगदान और उनका लगाव

हेमंत मुखर्जी जीवनी : रबीन्द्र संगीत को जन – जन तक पहुँचाने में इनके योगदानों को युगों – युगों तक भुलाया नहीं जा सकता । निःस्सन्देह इनकी महिमा को पाकर रबीन्द्र संगीत मण्डित हुआ है । ऐसी उस महान् विभूति की मृत्यु पर शोक व्यक्त करते हुए प . बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने अपने सन्देश में कहा कि “ उनके निधन से राष्ट्र को अपूर्णीय क्षति हुई है

हेमंत मुखर्जी जीवनी : हेमंत मुखर्जी भारत के अब तक के सबसे विपुल संगीतकारों में से एक थे।  वह वीणा पर एक कलाप्रवीण व्यक्ति भी था, जो एक तार वाला वाद्य यंत्र था।  वह अपने असाधारण कामचलाऊ कौशल और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत शैली में अपनी महारत के लिए जाने जाते थे।  उपकरण पर उनके कामचलाऊ कौशल के लिए उन्हें “वीणा की सिम्फनी” कहा जाता था।

हेमंत मुखर्जी एक गिटारवादक और संगीत निर्माता हैं।  उन्हें बचपन से ही संगीत का शौक रहा है, और जब उनके माता-पिता नहीं देख रहे थे, तो वे अक्सर खेलने के समय में गाने के तरीके खोजते थे।  उन्होंने कम उम्र में गिटार बजाना सीखा, और अक्सर अपने पिता के साथ स्कूल के कार्यक्रमों और स्थानीय समारोहों में प्रदर्शन करते थे।  जैसे-जैसे वह आगे बढ़ता गया, मुखर्जी अन्य वाद्ययंत्रों को भी उठाते गए और संगीत के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।

हेमंत मुखर्जी जीवनी :  जब उन्होंने अपनी किशोरावस्था में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दुनिया की खोज की, तो उनकी विविध संगीत रुचियों को पुख्ता किया गया।  मुखर्जी वीणा वादन की कलात्मक शैली के प्रति आकर्षित थे और इस शैली के महान लोगों से सीखने के लिए उत्सुक थे। 

Hemant Mukherjee in hindi :  इन वर्षों में, मुखर्जी ने विभिन्न शैलियों के संगीत का अध्ययन किया और कई कलाकारों की टुकड़ी में बजाया।  वह वीणा पर एक कलाप्रवीण व्यक्ति था, जो एक तार वाला वाद्य यंत्र था, और अपने असाधारण कामचलाऊ कौशल और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत शैली में अपनी महारत के लिए जाना जाता था।   मुखर्जी ने भारत और दुनिया भर के अन्य संगीतकारों के साथ सहयोग किया है, और फिल्म और टेलीविजन के लिए संगीत भी तैयार किया है।

हेमंत मुखर्जी जीवनी : मुखर्जी भारत के अब तक के सबसे विपुल संगीतकारों में से एक बन गए।  वह अपने असाधारण कामचलाऊ कौशल और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत शैली में अपनी महारत के लिए जाने जाते थे। वीणा पर मुखर्जी का गुण कम उम्र से ही स्पष्ट हो गया था, और वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के इतिहास में सबसे प्रसिद्ध कलाकारों और सुधारकों में से एक बन गए।

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हेमंत मुखर्जी का जन्म कब और कहाँ हुआ?

हेमंत मुखर्जी जीवनी : ” संगीत की दुनिया के इस सितारे का जन्म 16 जून , 1920 को बनारस के एक बंगाली परिवार में हुआ था। इनके पिता एक साधारण क्लर्क थे , तो माँ संवेदनशील घरेलू महिला थीं । गरीबी में वह पले , अभावों में आगे बढ़े , किन्तु एक दिन अपने संगीत स्वरों से उस ऊँचाई पर पहुँच गए जिसकी उन्होंने स्वयं कभी परिकल्पना भी न की थी ।

वह इतने शर्मीले स्वभाव के थे कि उन्हें कभी पिता से किसी चीज की अपेक्षा होती , तो प्रत्यक्षतः पिता से न कहकर माँ से कहते और माँ उनकी आवश्यकता की पूर्ति करवातीं । बचपन से ही संगीत के प्रति उनका इतना अधिक प्रेम था कि वह हर समय संगीत की ही धुन में मस्त रहते थे । एक दिन उन्हें मित्रा स्कूल की कक्षा से इसलिए निकाल दिया गया , क्योंकि वह कक्षा में गीत गुनगुना में रहे थे ।

हेमंत मुखर्जी जीवनी : कालान्तर में उनका परिवार बनारस से बंगाल जा बसा । उनके पिता की महत्वाकांक्षा उन्हें इंजीनियर बनाने की थी इसलिए उन्हें बंगाल के जादवपुर विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग के कोर्स में दाखिला दिलाया गया। यहाँ आने पर उनके संगीत प्रेम में और बढ़ोत्तरी हो गई ,

हेमंत मुखर्जी का अपना पहला गाना का जादु

Hemant Mukherjee in hindi : लेकिन संगीत की लगन के कारण इस पढ़ाई में उनका मन न लगा और वह इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर संगीत की दुनिया से जुड़ गए । 15 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला गीत रेडियो पर गाकर अपने संगीत के जीवन की सार्वजनिक यात्रा प्रारम्भ की । इस गीत को सुनकर इनके माता – पिता और परिचित काफी प्रसन्न हुए । उस समय तक संगीत की दुनिया में गीत से चारों तरफ इनके नाम की धूम मच गई ।

इनके स्वरों के जादुई आकर्षण ने लोगों को में बंगला फिल्मनिमाई संन्यास ‘ इनके लिए मील का पत्थर साबित हुई । इसमें गाए गए एक पंकज मलिक , आर . सी . बोराल और कुन्दनलाल सहगलल का नाम छाया हुआ था । 1944 ई . मोहित कर लिया । कुछ समय तक हरि प्रसन्नदास के सहायक के रूप में काम करने के बाद सर्वप्रथम 1945 में ‘ पूर्वराग ‘ नामक फिल्म में उन्होंने स्वतन्त्र संगीत दिया ।

प्रियतमा ‘ फिल्म से उनकी ख्याति और बढ़ गई । हेमन्त मुखर्जी की जीवन यात्रा की सफलता का एक दूसरा चरण तब शुरू हुआ जब हेमन्त गुप्त ने ‘ आनन्दमठ ‘ की संगीत रचना के लिए इन्हें बम्बई बुलाया । पहली बार हिन्दी फिल्म ‘ आनन्दमठ ’ में गीत ‘ वन्देमातरम् ‘ गाकर फिर इन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

हेमंत मुखर्जी का सफलता

Mukherjee biography : 1951 में वह फिल्मिस्तान से जुड़ गए । 1954 में ‘ नागिन ‘ फिल्म की सफलता का मुख्य श्रेय उनके संगीत को दिया गया और अब वह उन्नति के शिखर पर पहुँच गए । धीरे – धीरे संगीत कार के साथ – साथ गायक के रूप में भी उन्होंने ख्याति अर्जित की । अपने पुरुषार्थ से ऊँचाइयों को संस्पर्श करने वालों में उनका नाम सदा अग्रणी रहेगा । विरासत में गरीबी पाकर उससे संघर्ष करते हुए संगीत की दुनिया से जुड़ गए । उन्होंने अपनी आत्मकथाआनन्दधारा ‘ में इसका उल्लेख करते हुए लिखा है कि हम बहुत गरीव थे । मेरे पिताजी साधारण क्लर्क थे । स्कूल में मुझसे रियायती फीस ली जाती थी ।

Mukherjee biography : कॉलेज छोड़ने के बाद जेब खर्च के लिए ट्यूशन करना पड़ता था । प्रारम्भ में दो लड़कियाँ ही मेरे पास संगीत सीखने आईं , किन्तु जब मेरे गानों के चार रिकॉर्ड बाजार में आ गए , तो मेरी प्रसिद्धि बढ़ी और मुझे अधिक ट्यूशन मिलने लगे । ऐसी गरीबी में पलकर अपनी मेहनत और लगन से वह एक दिन संगीत की दुनिया के सिरमौर बन गए , किन्तु वह जमीन से कभी नहीं कटे । अहंकार से सदैव कोसों दूर रहे ।

अपनी गरीबी को ध्यान में रखते हुए हर नए कलाकार को अपनी फिल्मों में काम देते और उन्हें अच्छे कार्य करने के लिए सदैव प्रेरित करते । इन नए कलाकारों से उन्हें कितनी भी हानि क्यों न उठानी पड़ती , परन्तु वह अपने भूले दिनों की याद करते हुए उनसे सदैव सहयोग करते ।

हेमंत मुखर्जी बंगाली गाने | hemanta mukherjee bengali song

  • Tumi Ele Anek Diner Pare, तुमी एले अनेक डिनर पारे,
  • Tarpar Tar Aar Par Nei, तारपर तार आर पर नी,
  • Jetey Jetey Kichhu Katha जेटी जेटी किच्छू कथा
  • Ei Raat Tomar Amar, एई रात तोमर अमर,
  • Kato Din Pare Ele, कातो दिन पारे एले,
  • Jodi Jante Chao Tumi, जोड़ी जाते चाओ तुमी,
  • Duranta Ghurnir Ei Legechhe Paak, दुरंत घुरनिर ए लेगेछे पाक,
  • Ami Dur Hote Tomarei Dekhechhi, अमी दूर होते तोमारेई देखेछी,
  • Aman Dagore Dagore Chokhe, अमन डागोर डागोर चोखे,
  • Aaro Bhalo Hoto, आरो भालो होटो,पथ हराबो बोले एबर,
  • Path Harabo Bolei Ebar, पथ हरबो बोलें एबर
  • Olir Katha Shune Bakul Hase, ओलिर कथा शुने बकुल हसे,
  • O Nadire And Ekti Katha,  हे नादिरे और एकती कथा,
  • Moner Janala Dhore Unki Diye, मोनेर जनला धोरे उनकी दीये,

निष्कर्ष : हेमंत मुखर्जी का मृत्यु कब और कहाँ हुआ?

हेमंत मुखर्जी जीवनी : ऐसी उस महान् संगीत विभूति को जब 1987 में सरकार की तरफ से संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने के कारण पद्मश्री अलंकरण से सुशोभित किया गया , तो उन्होंने यह कहकर इसे लेने से इनकार कर दिया कि अब बहुत देर हो गई है । वास्तव में संगीत के इस महारथी को जो पुरस्कार बहुत पहले मिल जाना चाहिए था । वह निचले दर्जे के कलाकारों को मिलने के बाद फिर लेने का कोई औचित्य भी नहीं रह जाता ।

इस प्रकार सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक एवं संगीतकार हेमन्त दा का पार्थिव शरीर 26 सितम्बर 1989 को भारत की मिट्टी में विलीन हो गया । उनके निधन से भारतीय संगीतन का एक सशक्त स्वर शान्त हो गया । आज हेमन्त दा सशरीर भले ही हमारे बीच में नहीं हैं , किन्तु उन्होंने संगीत का जो स्वर भारतीयों को दिया , उसकी गूंज युगों – युगों तक सुनी जाती रहेगी । वह संगीत के अन्तरिक्ष में ध्रुव तारे की तरह अटल होकर चमकते रहेंगे । आज वह मरकर भी अपने संगीत स्वरों के कारण अमर हैं ।

हेमंत मुखर्जी जीवनी FAQ

हेमंत मुखर्जी को “वीणा की सिम्फनी”क्यों कहा गया था?

उपकरण पर उनके कामचलाऊ कौशल के लिए उन्हें “वीणा की सिम्फनी” कहा जाता था।

हेमंत मुखर्जी ने पद्मश्री अलंकरण क्यों नहीं लिया?

पद्मश्री अलंकरण : इस महारथी को जो पुरस्कार बहुत पहले मिल जाना चाहिए था । वह निचले दर्जे के कलाकारों को मिलने के बाद इन्हें पद्मश्री अलंकरण दे रही थी। जिसके कारण इन्होंने यह कहकर इसे लेने से इनकार कर दिया कि अब बहुत देर हो गई है ।

हेमंत मुखर्जी के पिता क्या काम करते थे?

इनके पिता एक साधारण क्लर्क थे।