fibonacci jiwan parichay in hindi
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fibonacci jiwan parichay in hindi | फिबोनेकी का जीवन परिचय | फिबोनेकी का नंबर system

fibonacci jiwan parichay in hindi

fibonacci jiwan parichay in hindi : खण्ड यूरोप , देश इटली , प्रदेश टस्केनी और टस्केनी में नगर पीसा वही पीसा जो विश्व प्रसिद्ध झुकती मीनार के लिए विख्यात है , उसी नगर की बात है । यह वहाँ तेरहवीं शताब्दी में गणित और अंकों के ऐसे जादूगर ने जन्म लिया और जिसके कारनामों में से कुछ तो 700 वर्ष बाद आज भी दुरूह हैं , अबूझ हैं ।

लियोनार्डो फिबोनेकी इतिहास के सबसे प्रसिद्ध गणितज्ञों में से एक हैं।  आपने उसके बारे में सुना होगा, या शायद आपने उसके सबसे प्रसिद्ध सीक्वेंस को बिना समझे ही इस्तेमाल किया हो।  लेकिन फिबोनेकी कौन था, और वह कहाँ से आया था?  उत्तर जटिल है, और गणित की समृद्ध और आकर्षक दुनिया में एक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

fibonacci jiwan parichay in hindi : वह था- फिबोनेकी ( Fibonacci ) , जिसका गणित – साधना – स्थल था- पीसा नगर , न्यूटन और आइन्स्टीन की भाँति फिबोनेकी की भी पूत के पाँव पालने में अथवा होनहार बिरवान जैसी कहावतों को झुठलाकर ,
बालपन में मूर्खराज कहलाने पर भी जीवन के मध्यकाल से एक नक्षत्र की भाँति जो उदित हुआ सो गणित के क्षेत्र में अक्षय कीर्ति भी अर्जित की ।
सन् 1175 में जन्मे फिबोनेकी को पास – पड़ोस के लोग ‘ ठस्स दिमाग ‘ कहते थे । उसके पिता का नाम भी तो बोनेकियो था , जिसका अर्थ था- भोलाभाला ।

फिबोनेकी एक गणितज्ञ और एक इतालवी व्यापारी ?

fibonacci jiwan parichay in hindi : लियोनार्डो फिबोनेकी एक गणितज्ञ और एक इतालवी व्यापारी थे जो 12 वीं शताब्दी में रहते थे।  वह अपने नाम: 0, 1, 1, 2, 3, 5, 8, 13, 21, 34, 55, 89, 144, और इसी तरह की संख्याओं के अनुक्रम की खोज के लिए जाने जाते हैं।  फिबोनेकी की संख्या पूरे प्रकृति में पाई जाती है, जिसमें पौधों की वृद्धि और सीपियों का आकार भी शामिल है।  अनुक्रम मानव शरीर में भी पाया जाता है: हमारी आंखों के बीच की दूरी, हमारी बाहों की लंबाई और हमारे पैरों की अवधि सभी छोटे फिबोनेकी द्वारा विभाजित होती हैं।

fibonacci jiwan parichay in hindi : लियोनार्डो पिसानो बिगोलो, जिसे फिबोनेकी के नाम से जाना जाता है, एक इतालवी गणितज्ञ और साहसी थे जो 12 वीं शताब्दी में रहते थे।  वह यूरोप के लिए हिंदू-अरबी अंकों, जो आधुनिक संख्या प्रणाली का आधार हैं, और यूरोप को दशमलव प्रणाली और शून्य की अवधारणा से परिचित कराने के लिए सबसे प्रसिद्ध हैं।  उन्होंने बीजगणित के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।  उन्होंने भूमध्यसागरीय दुनिया भर में बड़े पैमाने पर यात्रा की, जहां उन्हें विभिन्न प्रकार की गणितीय परंपराओं से अवगत कराया गया।

1175 में इटली के पीसा में जन्मे फिबोनेकी एक प्रमुख गणितज्ञ के पुत्र थे।  कम उम्र में, उन्होंने गणित के लिए एक रुचि दिखाई, और 20 साल की उम्र तक वे इटली के सबसे होनहार गणितज्ञों में से एक बन गए थे।  फिबोनेकी एक शानदार गणितज्ञ थे, लेकिन वे एक साहसी व्यक्ति भी थे।  12वीं शताब्दी की शुरुआत में, पीसा पश्चिमी दुनिया में गणितीय शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में से एक था।

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नामलियोनार्डो फिबोनेकी
जन्म1175
जन्म स्थानउत्तरी इटली के पीसा शहर
माता-पितागुग्लिल्मो और “बोनाची” (पिता)
पेशागणितज्ञ
प्रथम प्रकाशनबुक आफ ऐबेकस (1202)
मृत्यु 1250 (आयु 79-80)
मृत्यु स्थानपीसा, पीसा गणराज्य
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फिबोनेकी उपनाम – “पीसा का शेर”

fibonacci jiwan parichay in hindi : फिबोनेकी का जन्म और पालन-पोषण उत्तरी इटली के पीसा शहर में हुआ था।  ऐसा माना जाता है कि वह पिसान समाज के सबसे शक्तिशाली परिवार के रिश्तेदार रहे होंगे, और उन्होंने कम उम्र में ही अंकगणित और ज्यामिति का अध्ययन करना शुरू कर दिया था। 

उन्होंने खतरनाक पिसान जलमार्गों को नेविगेट करना भी सीखा, जिसके कारण उनका उपनाम “पीसा का शेर” हो गया।  माना जाता है कि अपनी युवावस्था के दौरान, फिबोनेकी ने पूरे यूरोप की यात्रा की, उस समय के सबसे प्रसिद्ध गणितज्ञों के साथ अध्ययन किया।

फिबोनेकी का प्रतिभाओं और गुण

fibonacci jiwan parichay in hindi :  फिबोनेकी कई प्रतिभाओं का व्यक्ति था।  वह एक कुशल गणितज्ञ, एक चतुर व्यवसायी और एक कुशल राजनयिक थे।  वह एक भावुक नाविक और एक साहसी खोजकर्ता भी था।  एक युवा व्यक्ति के रूप में, वह पूरे भूमध्य सागर में, उत्तरी अफ्रीका से इतालवी प्रायद्वीप के पूर्वी तट तक गया।

फिबोनेकी के सबसे बड़े जुनून में से एक गणित था, और उन्होंने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जबकि वे अभी भी एक युवा व्यक्ति थे।  उन्हें यूरोप में हिंदू-अरबी अंकों से परिचित कराने का श्रेय दिया जाता है, जो आधुनिक संख्या प्रणाली का आधार हैं। 

उन्होंने यूरोप में दशमलव प्रणाली और शून्य की अवधारणा भी पेश की, और बीजगणित में उनका काम अभूतपूर्व था।  शायद सबसे महत्वपूर्ण बात, उन्होंने यूरोपीय अकादमिक समुदाय के लिए गणित का अध्ययन करने की पिसान परंपरा की शुरुआत की, एक परंपरा जो अंततः उच्च शिक्षा के कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड सिस्टम बन जाएगी।

फिबोनेकी का बाल्यकाल और प्रारम्भिक छात्र जीवन

fibonacci jiwan parichay in hindi : फिबोनेकी का बाल्यकाल और प्रारम्भिक छात्र जीवन उत्तरी अफ्रीका के बुगिया नगर में बीता , जहाँ उसके पिता नौकरी पर तैनात थे ।

वहाँ बार बेरीकोस्ट के मुस्लिम अध्यापकों ने फिबोनेकी को प्रारम्भिक शिक्षा दी , जिसका मुख्य विषय था- अरब प्रणाली के अंकों का शिक्षण । शीघ्र ही फिबोनेकी के ध्यान में जम गया कि तत्कालीन प्रचलित ग्रीक अंक लेखन ( उदाहरणार्थ ) XCVIII के स्थान पर सीधा सपाट अरबी अंक अर्थात् अंग्रेजी 98 अधिक सरल है और सुग्राह्य भी है ।

प्रारम्भिक शिक्षा समाप्त करके फिबोनेकी अपने पीसा नगर आ गया और गणित की गहराइयों में बैठने के लिए खुले दिलो – दिमाग से नगर की सड़कों पर घुमक्कड़ी करता रहा । जेब में हर समय पड़े चाक से जब धुन आई , दीवार पर कुछ अंक लिख दिए ।

अरबी अंको का सूत्रपात : फिबोनेकी

fibonacci jiwan parichay in hindi : सन् 1202 में 27 वर्ष की आयु में उसने अपने निरीक्षणों का बुक आफ ऐबेकस ‘ के नाम से प्रथम प्रकाशन किया ।

वह शोध पत्र इस बात पर ऐतिहासिक महत्व पा गया कि यूरोप में अरबी अंको का सूत्रपात उसी के द्वारा हुआ । समूचे विज्ञान चिंतन जगत में हलचल मच गई । उसमें एक लघु प्रकरण ऐसा भी कुछ के नाम था जिसमें एक विशेष सैद्धान्तिक समस्या पर चर्चा थी और उसका हल भी था ।

वह चर्चा प्रश्न गणित शोधार्थियों के लिए अति रोचक था । उसके हल करने की प्रक्रिया न तो विभिन्न विज्ञान – विधाओं तथा कलाओं के भी रोशनदान खोलकर रख दिए । उनमें से गिनाए जा सकते हैं । यथा – वास्तुकला , महासागर विज्ञान , वनस्पति विज्ञान , जीव विज्ञान , सौर – नक्षत्र विज्ञान और संगीत

फिबोनेकी का गणित – चमत्कार : खरगोशों का मूल युगल

fibonacci jiwan parichay in hindi : दूसरे शब्दों में , फिबोनेकी के गणित – चमत्कार ने विश्व का कोई भी ज्ञान – विज्ञान – विधा अछूती नहीं छोड़ी ।
आइए , उसका एक सरसरा परिचय प्राप्त सं करें
खरगोशों का मूल युगल

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fibonacci jiwan parichay in hindi :  उदाहरण- नर – मादा खरगोश का एक जोड़ा आराम से खाने – पीने खेलने की सुविधासहित एक घेरे में रखा गया , ताकि निकल न सके और निरन्तर प्रगति का अवलोकन किया जा सके । देखना यह था कि एक वर्ष पूरा होने पर उनसे उत्पन्न सन्तानों सहित खरगोशों की कुल संख्या कितनी हो सकती है ?

यह मानकर चला गया कि पैदा होने के दो महीने पश्चात् से प्रजनन प्रारम्भ करते हुए एक जोड़ा प्रतिमास एक नए जोड़े को जन्म दे सकता है । फिबोनेकी की इस अजब सूझ ने अंकों के आश्चर्यजनक गणित को जन्म दिया । गणितज्ञों ने हिसाब लगाया , तो पाया कि प्रारम्भिक जोड़ा प्रथम मास छोड़कर दूसरे मास से प्रतिमास एक एक जोड़े को जन्म देता गया ।

साथ ही प्रारम्भ से चौथा महीना आरम्भ होने पर प्रथम सन्तान – जोड़े ने भी प्रजनन प्रारम्भ कर दिया । यों वर्षभर जहाँ नवोत्पन्न जोड़ा दो मास का हुआ , एक – एक जोड़ा प्रतिमास पैदा करता गया । वर्ष के अन्त पर संख्या 233 जोड़े पाई गई ।

फिबोनेकी का नंबर क्रमबद्ध रिकॉर्ड

fibonacci jiwan parichay in hindi : फिबोनेकी ने इनके क्रमबद्ध रिकॉर्ड पर नजर डाली , तो पाया कि बारह महीनों के बीच 5 युगल नह जस् उनके इंजन Balu या . न हो ,संख्याक्रम यों रहा 1 , 2 , 3 , 5 , 8 , 13 , 21 , 34 , 55 , 89 , 144 , 233. उसे आश्चर्य यह देखकर भी हुआ कि दूसरी संख्या के बाद हरेक आगे की संख्या पिछली दो संख्याओं का जोड़ बनती थी । आप भी यह सहज देख सकेंगे ।

यद्यपि यह संख्या बारह कक्षाओं से भी आगे अनन्त चल सकती है । तथापि खरगोशों की संख्या वृद्धि का यह क्रम अनन्त ही सही , फिबोनेकी ने 100 कक्षाओं तक जोड़कर देखा , तो प्रजनन सामर्थ्य तो नहीं , कुछ आयु सीमा और कुछ बुढ़ापा , इस पर रोक लगा देगा , परन्तु अन्तिम संख्या थी- 354 , 224 , 848 , 179 , 261 , 915 , 075– यानि कुल इक्कीस अंकों में बाएँ से ( इकाई , दहाई करते हुए ) दसवें अंक तक एक अरब तो हो गया ।

फिबोनेकी का दूसरा चमत्कार

fibonacci jiwan parichay in hindi : दूसरा चमत्कार यह कि यदि उपर्युक्त 1 से 233 तक के संख्या क्रम में किसी भी एक संख्या को ( प्रारम्भिक 1 , 2 , 3 छोड़कर ) उससे पूर्व की संख्या से विभाजित किया जाए , तो वह संख्या पिछली से 0.618034 गुना अधिक रहती है . 0.618034 फिबोनेकी अंक तथा ‘ स्वर्णिम माध्य ‘ के बस , अनुपात अंक यही करिश्माकार नाम से जग – प्रसिद्ध है ।

इसका प्रभाव कितना विस्तृत व कितना विशाल है ?

fibonacci jiwan parichay in hindi : उसका विशद वर्णन इन सीमित blog post में सम्भव नहीं । केवल कुछ उदाहरणों के संकेत द्वारा इस स्वर्णिम माध्य की सर्वव्यापकता का अनुमान लगाया जा सकेगा , क्योंकि धुरंधर गणितज्ञों की पीढ़ी – दर – पीढ़ी इसमें गहरी पैठती चली गई है और उनके परिश्रम के फलस्वरूप चमत्कारिक रहस्यों की परतों – पर – परतें खुलती आ रही हैं । ऐसी अनन्त है – यह खोज ! गणित का अर्थ अकेला अंकगणित ही तो नहीं , बीजगणित , लघुगणित , रेखागणित , त्रिकोणमिति – कितना कुछ है !!

जिस किसी मेट्री ( Metry ) अर्थात् माप का पुछल्ला लग गया , वही गणित हो गया । ये देखें तो अंकों , संख्याओं , रेखाओं , वर्तुलों , चक्रों तथा त्रिकोण , चतुष्कोण से लेकर अष्टकोण तथा बहुकोणीय आकृतियों में स्वर्णिम माध्य अर्थात् फिबोनेकी अंकों के चमत्कार गणित शुद्ध क्रम में सृष्टि भर में बिखरे पड़े हैं ।

निष्कर्ष: fibonacci jiwan parichay in hindi

fibonacci jiwan parichay in hindi : घोंघे की सीपी हो , मगरमच्छ की दंतावलि हो , मछलियों की अनन्त आकृतियाँ हों , बाघ के नख हों , सिंह के वक्र दंत हों , मकड़ी के जाले हों , तोते की चोंच हो अथवा स्थापत्य में मस्जिद , गिरजे के गुम्बद हों , मेहराब हों या मिस्र के पिरामिड हों ; सूरजमुखी फूल की गोलाई में बीजों की डिजाइन हो , अनन्नास फल तथा मधुमक्खी छत्ते की आकृतियाँ हों , फिबोनेकी का स्वर्णिम माध्य मिलेगा ही ।

फिबोनेकी का प्रथम प्रकाशन क्या था?

बुक ऑफ ऐबेकस

फिबोनेकी ने अपना प्रथम प्रकाशन कब किया?

सन् 1202 में 27 वर्ष की आयु में

फिबोनेकी का गणित के जगत में एक प्रयोग उदाहरण दे?

नर – मादा खरगोश का मूल युगल

fibonacci jiwan parichay in hindi : बस , एक अन्तिम उदाहरण देकर आज की वार्ता को यहीं विश्राम देंगे । उदाहरणस्वरूप मिस्र के एक पिरामिड की ऊँचाई 484 फीट , 5 इंच मापी गई जो 5 , 8 , 13 इंच बनती है । देखा , यहाँ भी 5 + 8 = 13 फिबोनेकी क्रम ?
अब यदि पिरामिड की ऊँचाई को त्रिज्या माना जाए , तो परिधि बैठेगी 36524.2 इंच ।
क्या मिस्र के गणितज्ञों को ज्ञात था कि एक वर्ष में दिनों की संख्या 365-242 होती है ?