dr vikram sarabhai essay in hindi
dr vikram sarabhai essay in hindi

dr vikram sarabhai essay in hindi | vikram sarabhai in hindi | विक्रम साराभाई का जीवन परिचय

dr vikram sarabhai essay in hindi : विक्रम साराभाई

dr vikram sarabhai essay in hindi : अन्तरिक्ष सदैव से ही मानव के लिए रहस्यमय रहा है । अन्तरिक्ष विज्ञान यद्यपि हमारे लिए नया नहीं है , फिर भी भारत आधुनिक अन्तरिक्ष क्लब का सदस्य देर से बना है । कुछ वर्षो पहले तक इस क्लब की सदस्यता अमरीका , सोवियत संघ , फ्रांस और जापान जैसे गिने चुने विकसित देशों तक ही सीमित थी ।

dr vikram sarabhai essay in hindi : आज हमारे देश को अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में जो महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है , उसका श्रेय उस महान् वैज्ञानिक को जाता है , जिसने वैज्ञानिकों को शोधकार्य करने के साथ – ही – साथ सामाजिक उत्थान करने की भी प्रेरणा दी । यह महान् वैज्ञानिक थे , बहुमुखी प्रतिभा के धनी , डॉ . विक्रम अंबालाल साराभाई

dr vikram sarabhai essay in hindi : उन्होंने ही भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों को प्रारम्भ किया , जिसके परिणामस्वरूप भारतीय उपग्रह अन्तरिक्ष में छोड़े गए । आज भारत के दूरस्थ क्षेत्रों में दूरदर्शन के द्वारा शुरू की गई योजनाओं की परिणीति है ।

dr vikram sarabhai essay in hindi

क्रमांकविषयविक्रम साराभाई का जीवन परिचय
1नामविक्रम साराभाई
2जन्म 12 अगस्त 1919 अहमदाबाद, भारत
3माता-पितासरला देवी-अंबालाल साराभाई
4पत्नीश्रीमती मृणालिनी
5मृत्यु30 दिसम्बर 1971 (उम्र 52) Halcyon Castle,कोवलम in तिरुवनंतपुरम, केरल, भारत
vikram sarabhai in hindi

डॉ . विक्रम साराभाई  का बाल्यकाल , जन्म एवं प्रारम्भिक शिक्षा

dr vikram sarabhai essay in hindi : डॉ . विक्रम साराभाई का जन्म 12 अगस्त , 1919 को गरुड़ पञ्चमी के दिन प्रसिद्ध व्यवसायी एवं उद्योगपति श्री अंबालाल साराभाई के घर हुआ था । आपकी माता का नाम श्रीमती सरला देवी था । बालक विक्रम की प्रारम्भिक शिक्षा उनकी माता के सुयोग्य निर्देशन में घर पर ही एक स्कूल खोलकर प्रारम्भ की गई । इस स्कूल में भाषा , विज्ञान , कला , बागवानी तकनीकी शिक्षा आदि के अलग – अलग योग्य शिक्षक थे । स्कूल में प्रयोगशालाओं की भी उचित व्यवस्था थी ।

एक समय स्कूल में तेरह शिक्षक थे , जिनमें से तीन पी.एच – डी . एवं यूरोप में प्रशिक्षित थे । गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने इस स्कूल के लिए एक कलाकार का न किया था , जो नृत्य कला की शिक्षा देते थे । अतः यह स्कूल उनमें अच्छे संस्कार डालने के साथ – साथ उनके जीवन को पूर्णतः विकसित करने का भी स्थल था । बालक विक्रम पर के वातावरण के साथ ही घर पर आने वाली महान् विभूतियों के सानिध्य का भी गहरा प्रभाव पड़ा ।

जिनमें प्रमुख थे- गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर , पं . मोतीलाल नेहरू , महात्मा गांधी , सरोजिनी नायडू , सी . वी . रमन , जवाहरलाल नेहरू आदि बचपन से ही वह मेधावी होने के साथ – साथ साहसिक भी थे ।

विक्रम साराभाई  का उच्च शिक्षा एवं शोध कार्य

dr vikram sarabhai essay in hindi : उच्च शिक्षा एवं शोध कार्य सेकेण्ड्री स्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत उन्होंने उच्च अध्ययन के लिए गुजरात कॉलेज , अहमदाबाद में प्रवेश ले लिया । इसके पश्चात् सैट जोन्स कॉलेज , कैम्ब्रिज से सन् 1939 में केवल बीस वर्ष की आयु में ही प्राकृतिक विज्ञान में ट्राइपोज परीक्षा उत्तीर्ण की भारत लौटने पर आपने इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस , बंगलौर में नोबेल पुरस्कार विजेता महान् वैज्ञानिक सर चन्द्रशेखर वेंकटरमन के निर्देशन में लगभग 5 वर्षों तक अन्तरिक्ष किरणों पर शोधकार्य किया ।

यहीं पर उनकी भेंट डॉ . होमी जहाँगीर भाभा से हुई , जो उस समय अन्तरिक्ष किरणों एवं मेसोन पर शोधकार्य कर रहे थे ।

डॉ . साराभाई का पहला शोध – पत्र सन् 1942 में बंगलौर की एक शोध पत्रिका में प्रकाशित हुआ , जो अंतरिक्ष किरणों की तीव्रता में परिवर्तन से सम्बन्धित था । सन् 1943 में केवल 23 वर्ष की आयु में विक्रम साराभाई पहाड़ी स्थानों पर अन्तरिक्ष किरणों का अध्ययन करने कश्मीर गए । वहाँ अध्ययन करने के पश्चात् इतनी ऊँचाई पर ही शोध संस्थान खोलने का उनका विचार हुआ ।

dr vikram sarabhai essay in hindi : सन् 1945 में विक्रम साराभाई पुनः कैम्ब्रिज गए और 1947 में वहाँ से पी.एच – डी . की उपाधि प्राप्त की तथा कैवेंडिश प्रयोगशाला कैम्ब्रिज में भी शोधकार्य किया । कैम्ब्रिज से लौटकर डॉ . साराभाई ने अहमदाबाद में भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला की स्थापना की , जो आज देश के प्रमुख शोध संस्थानों में से एक है । यह संस्था अन्तरिक्ष किरणों एवं बाह्य अन्तरिक्ष के अध्ययन को समर्पित है ।

डॉ . साराभाई भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला , अहमदाबाद के निदेशक रहे एवं सन् 1947 से 1965 तक अपने अथक परिश्रम एवं लगन से इस प्रयोगशाला में वैज्ञानिक कार्यों में तीव्रगति देने और विकसित करने में सफल रहे । सन् 1955 में इन्होंने प्रयोशाला की शाखा कश्मीर में गुलमर्ग नाम स्थान पर स्थापित की । इसी तरह के अन्य केन्द्र तिरुअनन्तपुरम् तथा कोडाईकनाल में भी स्थापित किए ।  डॉ . साराभाई ने अन्तरिक्ष विज्ञान एवं परमाणु भौतिकी पर उच्चस्तरीय शोधकार्य किया ।

डॉ . साराभाई के अनेक शोध – dr vikram sarabhai essay in hindi

  • पत्र फिजिक्स रिव्यू ,
  • नेचर ,
  • फिजिकल सोसायटी ऑफ लंदन जरनल ऑफ जियोफिजिकल रिसर्च ,
  • एस्ट्रोफिजिक्स जरनल ,
  • प्रोसीडिंग ऑफ द अकादमी ऑफ साइंसेज एवं
  • प्रोसीडिंग ऑफ द रॉयल सोसायटी में प्रकाशित हुए हैं ।

dr vikram sarabhai essay in hindi : उद्योगों में योगदान 

dr vikram sarabhai essay in hindi : उद्योगपति परिवार में जन्मे डॉ . विक्रम साराभाई ने गुजरात एवं देश के अन्य भागों में अनेक उद्योग स्थापित किए , जिनमें साराभाई कैमिकल्स , साराभाई ग्लास , सिम्बायोटिक्स लिमिटेड , साराभाई मार्क लिमिटेड और साराभाई इंजीनियरिंग ग्रुप प्रमुख हैं । डॉ . साराभाई ने ऑपरेशन्स रिसर्च ग्रुप की स्थापना अहमदाबाद में तथा साराभाई रिसर्च सेण्टर की बड़ोदरा में की ।

बम्बई में वे स्वास्तिक ऑयल मिल्स के व्यवस्थापक बने । कलकत्ता में डॉ . साराभाई स्टैण्डर्ड फार्मास्यूटिकल्स की व्यवस्था संभाली और पैनिसिलीन आदि औषधियों का निर्माण प्रारम्भ करवाया । डॉ . साराभाई ने अहमदाबाद में अहमदाबाद टेक्सटाइल इण्डस्ट्रीज रिसर्च एसोसिएशन की स्थापना की , जिसके वे सन् 1956 तक निदेशक रहे ।

dr vikram sarabhai essay in hindi

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान के जनक

dr vikram sarabhai essay in hindi : डॉ . साराभाई को भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों का जनक कहा जाता है । सन् 1962 में डॉ . साराभाई को भारत में अंतरिक्ष अनुसंधान एवं विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई । वे अन्तरिक्ष अनुसंधान हेतु गठित भारतीय कमेटी के अध्यक्ष बने । डॉ . साराभाई भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो ) का विस्तार करके देश को अन्तरिक्ष युग में ले गए । आज अन्तरिक्ष तकनीकी में भारत की जो उपलब्धियाँ है , उसका श्रेय डॉ . साराभाई को ही जाता है ।

dr vikram sarabhai essay in hindi :  ‘ रोहिणी ‘ और ‘ मेनका ‘ नामक भारतीय रॉकेट श्रृंखला के जनक डॉ . विक्रम साराभाई ही थे । उनके द्वारा शुरू की गई योजनाओं में एक योजना वह भी थी , जिसके अन्तर्गत सन् 1975 में ‘ आर्यभट्ट ‘ उपग्रह अन्तरिक्ष भेजा गया था । यद्यपि डॉ . साराभाई अन्तरिक्ष कार्यक्रमों में व्यस्त थे , मगर वह अपनी पहली पसन्द अंतरिक्ष किरणों के अध्ययन को नहीं भूले । उनकी मुख्य उत्सुकता यह जानने में थी कि इन किरणों में समय के साथ कैसे और क्या परिवर्तन होता है और इस क्रिया से जुड़ी अन्य बातों का तात्पर्य क्या है ? अन्तरिक्ष किरणें ऊर्जा कणों की वे धाराएँ हैं , जो पृथ्वी पर बाह्य अन्तरिक्ष से पहुँचती हैं ।

पृथ्वी पर आते – आते रास्ते में सूर्य , वायुमण्डल और चु प्रभावित होती हैं । अन्तरिक्ष में तारों में होने वाली घटनाओं से भी ये प्रभावित होती हैं । डॉ . साराभाई ने छोटी आयु में ही यह अनुभव कर लिया था कि अन्तरिक्ष किरणों के अध्ययन से हमें अन्तरिक्षीय चुम्बकत्व , वायुमण्डल , सूर्य की प्रकृति और बाह्य अन्तरिक्ष को समझने में सहायता करेगा ।

dr vikram sarabhai essay in hindi : अन्य उपलब्धियाँ एवं पुरस्कार

dr vikram sarabhai essay in hindi : डॉ . विक्रम साराभाई सन् 1962 में भारतीय विज्ञान कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे । 1966 तक वह अनेक निजी क्षेत्र की अनेक कम्पनियों के निदेशक रहे । 1962 से 1965 तक आप इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के निदेशक रहे ।1966 में वह परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव व परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष नियुक्त हुए । इन्होंने योजना आयोग के सदस्य , वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की कार्यसमिति के सदस्य के रूप में सराहनीय कार्य किया ।

dr vikram sarabhai essay in hindi : साथ ही यह केन्द्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड एवं सिनेट , गुजरात विश्वविद्यालय के भी सदस्य रहे । डॉ . विक्रम साराभाई को इण्डियन अकादमी ऑफ साइंसेज , नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज ऑफ इण्डिया फिजीकल सोसायटी , लंदन और कैम्ब्रिज फिलोसॉफिकल सोसायटी का ‘ फैलो ‘ बनाकर सम्मानित किया गया ।

dr vikram sarabhai essay in hindi : उनके कार्यों की सर्वत्र अनूठी छाप रही है । उनके उच्चकोटि के शोध कार्य को देखते हुए सन् 1962 में उन्हें भौतिकी के लिए शान्तिस्वरूप भटनागर पुरस्कार से ‘ पद्म भूषण ‘ से सम्मानित किया । सन् 1968 में वह यूनाइटेड नेशन्स कॉन्फ्रेंस ऑन पीसफुल यूजेज ऑफ आउटर स्पेस के अध्यक्ष रहे । सन् 1970 में डॉ . विक्रम साराभाई वियना में 14 वीं अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेन्सी की जनरल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं सन् 1971 में परमाणु शक्ति के शान्तिपूर्ण उपयोग की चौथी कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष रहे ।

संस्कृति एवं समाज से लगाव

dr vikram sarabhai essay in hindi : डॉ . साराभाई का प्राचीन भारतीय संस्कृति और पुरातत्व से बड़ा लगाव था । संस्कृति , चित्रकला एवं फोटोग्राफी में भी उनकी गहरी रुचि थी । एक कलाकारमुक्त वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सके , नए प्रयोग कर सके , इस उद्देश्य को मूर्तरूप प्रदान करने के लिए उन्होंने ‘ दर्पण ‘ नामक संस्था का शुभारम्भ किया । इस संस्था की निदेशिका डॉ . साराभाई की धर्मपत्नी श्रीमती मृणालिनी साराभाई हैं , जो स्वयं एक प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं ।

डॉ . साराभाई का मत था कि वैज्ञानिकों को शोधकार्य में तो लगे रहना चाहिए , लेकिन सामाजिक दायित्वों से भी पीछे नहीं हटना चाहिए । वैज्ञानिकों को समाज , ग्राम व देश की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए ।

विक्रम साराभाई की खोज और विक्रम साराभाई की मृत्यु कैसे हुई ?

dr vikram sarabhai essay in hindi : सन् 1975-76 में सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टेलीविजन एक्सपैरीमेंट ( साइट ) कार्यक्रम , जिसका लक्ष्य 2400 ग्रामों में रहने वाले पचास लाख भारतीयों तक शिक्षा को पहुँचाना था , का श्रेय भी उन्हीं को जाता है । ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीविजन प्रसारण द्वारा शिक्षा , कृषि एवं ग्रामीण विकास का उनका स्वप्न आज साकार हो रहा है । भारत का यह सपूत , महान् वैज्ञानिक , देशरत्न 30 दिसम्बर , 1971 को जब थुम्बा रॉकेट प्रमोचन केन्द्र की यात्रा पर था , पंचतत्व में विलीन हो गया ।

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान के जनक डॉ . साराभाई की 72 वीं जयन्ती के अवसर पर 12 अगस्त , 1991 से भारत सरकार द्वारा दूरदर्शन पर ‘ सुदूर संवेदन ‘ पर आधारित एक धारावाहिक कार्यक्रम का प्रसारण प्रारम्भ करके उन्हें श्रद्धांजलि दी गई है ।

FAQ

विक्रम साराभाई के पिता का नाम क्या था?

अंबालाल साराभाई

विक्रम साराभाई की मृत्यु कैसे हुई?

थुम्बा रॉकेट प्रमोचन केन्द्र की यात्रा पर

विक्रम साराभाई की मृत्यु कब हुई?

30 दिसम्बर 1971 (उम्र 52)Halcyon Castle,कोवलम in तिरुवनंतपुरम, केरल, भारत

निष्कर्ष :dr vikram sarabhai essay in hindi

dr vikram sarabhai essay in hindi : डॉ . विक्रम साराभाई उन महान् पुरुषों में से हैं , जिन्होंने विश्व में भारतवर्ष को गौरवपूर्ण स्थान पर तो पहुँचाया ही , साथ ही भारतीय समाज का भी उत्थान किया । युगों – युगों तक आपका जीवन एवं आपके कार्य वैज्ञानिकों को प्रेरणा प्रदान करते रहेंगे ।

(dr vikram sarabhai essay in hind, ivikram sarabhai in hindi)