Dr. Paal biography in hindi
Dr. Paal biography in hindi

Dr. Paal biography in hindi | डॉ . बी . पी . पाल (बेंजामिन पियरी पॉल) जीवन परिचय, dr.b.p.paal biography, डॉ. पाल का जीवन परिचय

डॉ. पाल का जीवन परिचय

Dr. Paal biography  : हरित – भरित , शस्य – श्यामला भारत की पावन धरती पर ऐसे महान् और वरेण्य कृषि विज्ञानियों ने जन्म लिया है , जिनकी कीर्ति – कौमुदी द्वारा कृषि विज्ञान जगत् का इतिहास प्रकाशित है । उसी शृंखला के सुप्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक हुए डॉ . बैंजामिन प्यारे पाल ,

डॉ. पाल का शिक्षा तथा जन्म कब और कहाँ हुआ?

Dr. Paal biography : डॉ . पाल का जन्म 26 मई , 1906 को मुकुन्दपुर ( पंजाब ) में हुआ था । उनकी प्राथमिक शिक्षा – दीक्षा बर्मा में हुई । उन्होंने रंगून विश्वविद्यालय से एम . एस . सी . तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी ( विद्या वाचस्पति ) की उपाधि प्राप्त की । यह एक संयोग ही था कि शोध कार्यों के दरम्यान उन्हें दो विख्यात गेहूँ प्रजनकों का मार्गदर्शन प्राप्त होने लगा था , वे वैज्ञानिक थे- सर रोलैण्ड विफ्फेन और सर फ्रैंक एंग्लीडो ।

Dr. Paal biography : डॉ . पाल को सन् 1933 में द्वितीय आर्थिक वनस्पति वैज्ञानिक के रूप में नियुक्त किया गया । जिस संस्था में उनकी यह नियुक्ति हुई उसका नाम था- इम्पीरियल एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट ( सम्प्रति भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ) । उन्होंने सन् 1950 में नवगठित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान , नई दिल्ली के निदेशक का पदभार ग्रहण किया था ।

Dr. Paal biography : सन् 1965 में जब पुनर्गठित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् अस्तित्व में आया , तो डॉ . पाल ही सर्वप्रथम महानिदेशक बनाए गए । इसी पद पर पूरी बौद्धिक ऊर्जा व शारीरिक सामर्थ्य से 17 वर्षों तक कार्य करते हुए 1972 में वे सेवानिवृत्त हुए थे । आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के लगभग तीन दर्जन राष्ट्रीय स्तर के शोध संस्थान कार्य कर रहे हैं । वैज्ञानिक पुरोधा डॉ . पाल कृषि शिक्षा और शोध की समस्याओं को समग्रता से समझने और उसके निराकरण की चेष्टा करते थे।

डॉ . बी . पी . पाल (बेंजामिन पियरी पॉल) का जीवन परिचय

नामडॉ . बी . पी . पाल (बेंजामिन पियरी पॉल)
जन्म26 मई , 1906
जन्म स्थानमुकुन्दपुर ( पंजाब )
पिता-माता डॉ. राला राम और इंदर देवी
मृत्यु14 नवम्बर , 1989 (83 वर्षों)
सलाहकारसर रोलैण्ड विफ्फेन और सर फ्रैंक एंग्लीडो
सम्मानपद्मश्री , पद्मभूषण , पद्म विभूषण
प्रशिद्धि पौध प्रजनन
योगदानकृषि, समाज सेवा
Dr. Paal biography in hindi

डॉ. पाल का कृषि शिक्षा एवं प्रशिक्षण मे योगदान

Dr. Paal biography in hindi : अपने निदेशक के रूप में सेवाकाल में उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ( IARI ) में स्नातकोत्तर विद्यालय ( पोस्ट ग्रेजुएट स्कूल ) की स्थापना की थी । बेशक , यह एक ऐसा कदम था जिससे न केवल कृषि विज्ञान की उच्च शिक्षा की शुरूआत हुई , वरन् जो भविष्य में स्थापित हुए देश के अन्य कृषि विश्वविद्यालयों का मार्गदर्शक भी बना । सत्यशोधक डॉ . बैंजामिन प्यारे पाल द्वारा अन्वीक्षण / अनुसंधान के युक्त बुनियादी ढांचे और उसकी कार्य नीति की ऐसी सुदृढ़ आधारशिला रखी गई जो आगे चलकर देश में ‘ हरित क्रान्ति ‘ ( Green Revolution ) की पृष्ठ पोषक साबित हुई ।

कृषि शिक्षा एवं प्रशिक्षण की नीतियों के निर्माण और इन दोनों मोर्चों पर स्तरोन्नयन में उनके योगदान को मुलाया नहीं जा सकता , क्योंकि इस विषयक उनकी सेवाएँ भारतीय कृषि विकास के इतिहास में प्रमुख उपलब्धि हैं । बेहतर उपज , बेहतरीन गुणवत्ता और रोग प्रतिरोधिता की बारीकियों संकरित गेहूँ की उन्नत किस्में डॉ . पाल के नाम का पर्याय बन गई , उनके द्वारा प्रजनित गेहूं की एन . पी . 700 और 800 श्रृंखला की प्रजातियों का देश भर में कृषिकरण किया गया ।

Dr. Paal biography in hindi : तीन प्रकार के रतुए की प्रतिरोधी ( Rust Resistant ) गेहूँ की एन.पी. 809 प्रजाति गेहूँ प्रजनन की ऐतिहासिक यात्रा में मील के पत्थर ( Mile Stone ) माने जाते हैं । यही कारण है । कि उनके इस अनुसंधान को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की मान्यता प्राप्त हुई है ।

अग्रणी मान्यता के जिन कार्यों की आधारशिला डॉ . पाल ने रखी थी उनमें हैं- आलू प्रजनन का बुनियादी ढाँचा निर्माण , तम्बाकू की पर्ण कुंचन ( Leaf Curl ) रोग की प्रतिरोधी प्रजातियों का प्रजनन , भारत में आर्थिक पौधों के वैज्ञानिक परिचय की शुरूआत , पादप आनुवंशिक संसाधनों के संकलन , मूल्यांकन , संरक्षण और अभिलेखन की अवधारणा का प्रतिपादन उन्होंने आर्थिक पौधों में संकर ओज और शोभादार पौधों के प्रजनन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए ।

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डॉ. पाल के द्वारा किये गये खोज कार्य तथा पुस्तके

Dr. Paal biography in hindi: गुलाब की डॉ . होमी भाभा , राजा सुरेन्द्र सिह ऑफ नालागढ़ , दिल्ली प्रिंसेस और बंजारन जैसी चर्चित किस्में डॉ . पाल ही द्वारा विकसित की गई थीं । उनके द्वारा खोजी गई बोगेनबिलिया की डॉ . आर . आर . पाल नामक किस्म भी काफी जनप्रिय हुई । पुष्प विज्ञान के क्षेत्र में डॉ . बी . पी . पाल की बहुमूल्य देनदारियों का सम्मान करते हुए क्रोटन , गुड़हल ( हिबिस्कस ) बोगेनबिलिया और गुलाब की एक – एक प्रजाति का नामकरण उनके नाम पर किया गया है ।

Dr. Paal biography in hindi : व्यक्तिगत एवं संयुक्त रूप से , डॉ . पाल ने , कुल मिलाकर , सात पुस्तकों का प्रणयन किया था । उनमें से ‘ दि रोज इन इण्डिया ‘ एवं ‘ ब्यूटीफुल क्लाइम्बर्स ऑफ इण्डिया ‘ नामक पुस्तकें अत्यन्त समादृत हैं । उनकी ‘ रोज इन इण्डिया ‘ नामक पुस्तक गुलाबविद् गुलाब के विश्वकोश की मान्यता देते रहे हैं ।

डॉ. पाल के पद्मश्री , पद्मभूषण , पद्म विभूषण की उपाधियाँ


Dr. Paal biography in hindi : यह तो हुआ सूक्ष्म वैज्ञानिक सेवाओं का संक्षिप्त वृत्तान्त , किन्तु यदि स्थूल रूप में अन्तर्राष्ट्रीय को दुनिया भर के तौर पर उनकी कैनवास पर उनकी सामर्थ्य और उपलब्धियों का सहज अन्दाज लगाना हो , तो उन्हें प्राप्त राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान , पदवियों एवं विशिष्ट उपलब्धियों पर एक नजर डालना काफी होगा । भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें पद्मश्री , पद्मभूषण , पद्म विभूषण की उपाधियाँ दी थीं ।

देश के 6 कृषि विश्वविद्यालयों और भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा डी.एस.सी. की मानद उपाधि , संजय गांधी स्मारक पुरस्कार और ओ . पी . भसीन पुरस्कारों से उन्हें अलंकृत किया गया था । डॉ . पाल 11 राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय शैक्षिक प्रतिष्ठानों , निकायों के या तो असाधारण सदस्य थे या अध्यक्ष ।

Dr paal : इन प्रतिष्ठानों में रॉयल सोसायटी , लन्दन और  लेनिन ऑल यूनियन अकादमी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेस , मास्को , जैसी- विश्वविख्यात संस्थाएँ शामिल हैं । श्रेष्ठतर वैज्ञानिक , दूरअंदेशी शिक्षाविद् , अनन्य प्रकृति प्रेमी और सजग न्यायप्रिय प्रशासक के रूप में ही नहीं , बल्कि डॉ . पाल ने ‘ सण्डे पेंटर ‘ के रूप भी अपने सौन्दर्यानु भूतिपूर्ण कला – कौशल को प्रदर्शित किया था ।

Dr. Paal biography in hindi : -उन्होंने अनेक वर्षों तक अखिल भारतीय कला एवं हस्तकला सोसायटी के अध्यक्ष पद का सफलतापूर्वक निर्वाह किया था । इस सोसायटी के उपाध्यक्ष पद पर तो वे जीवन पर्यन्त बने रहे । उनमें जहाँ नैसर्गिक सौन्दर्यबोध की जीवन्त भावना रची बसी थी वहाँ सुगम संगीत साधना के प्रति भी उनका अनुराग कम न था । कदाचित् यही कारण था कि अपने समकालीन पर्यावरण नियोजन और समन्वयन के पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी उनकी सहज सक्रियता और सजगता देखते ही बनती थी । अनी अग्रणी स्वयंसेवी संस्था के भी वे अध्यक्ष थे ।

डॉ . बी . पी . पाल का मृत्यु कब तथा कहाँ हुआ?

डॉ . बी . पी . पाल का मृत्यु  : वरेण्य कृषि वैज्ञानिक डॉ . बी . पी . पाल का निधन 14 नवम्बर , 1989 को हो गया । इस प्रकार 83 वर्षों की उनकी स्थूल शरीर की जीवन यात्रा तो पूरी हो गई , किन्तु उनकी यशः शरीर की कीर्ति पताका अभी दिगू – दिगन्त में फहरा रही है और आने वाली पीढ़ी के लिए उनकी कृतियाँ एक बहुमूल्य थाती बन गई हैं , क्योंकि उनकी सेवाएँ चन्द खास लोगों की पसन्द नहीं थीं ,

डॉ . बी . पी . पाल का निष्कर्ष : वरन् उनसे वैज्ञानिक , शिक्षक , छात्र , खेतिहर , बागवान और आम फहम आदमी का सीधा सरोकार पहले भी था और अब भी है । अन्त में , एक बार फिर डॉ . पाल की जिन्दादिल लगनशील रचनात्मकता और वैज्ञानिक संवेदनात्मकता की तहेदिल से तारीफ किए बगैर उनकी संक्षिप्त जीवनी लिखना एक अधूरी और गैर जिम्मेदाराना कोशिश मानी जाएगी – Dr. Paal biography

डॉ पाल से जुड़े कुछ FAQ

डॉ . पाल के लिखे पुस्तकों के नाम क्या है?

रोज इन इण्डिया, ‘ दि रोज इन इण्डिया ‘ एवं ‘ ब्यूटीफुल क्लाइम्बर्स ऑफ इण्डिया

डॉ. पाल का शिक्षा कहां से हुआ है?

रंगून विश्वविद्यालय से एम . एस . सी . तथा कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी ( विद्या वाचस्पति

डॉ . बेंजामिन पियरी पॉल के रूचियाँ बताये!

सण्डे पेंटर, श्रेष्ठतर वैज्ञानिक , दूरअंदेशी शिक्षाविद् , अनन्य प्रकृति प्रेमी और सजग न्यायप्रिय प्रशासक

डॉ पाल ने कितने पुस्तक लिखे हैं?

7 पुस्तक

डॉ पाल के माता-पिता के नाम क्या है?

इंदर देवी और डॉ. राला राम