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महर्षि दयानन्द सरस्वती जीवनी

dayanand saraswati in hindi : 19 वीं शताब्दी में भारतीय जीवन में आए अन्धकार को दूर करने में स्वामी दयानन्द सरस्वती का विशिष्ट स्थान है । ‘ वेदों की ओर लौटो ‘ ( Back of Vedas ) का नारा देकर भारत व हिन्दू धर्म को नवजीवन प्रदान करने वाले महर्षि दयानन्द ने गुजरात की मोरवी रियासत में टंकारा नाम के छोटे से गाँव में 1824 ई . में जन्म लेकर श्रीकृष्णलाल त्रिवेदी के गृहस्थ जीवन में चार चाँद लगा दिए ।

dayanand saraswati in hindi : उनके पिताश्री शैव धर्म के उपासक थे । सम्भवतः इसीलिए उनके बचपन का नाम ‘ मूलशंकर ‘ रखा गया । स्वामी दयानन्द प्रतिभा के धनी थे । यही कारण है कि उन्होंने शीघ्र ही संस्कृत , व्याकरण तथा वेदों की शिक्षा अर्जित कर ली । ‘ पूत के पाँव पालने में ही दिखाई पड़ जाते हैं , ‘ यह उक्ति दयानन्दजी पर पूरी तरह लागू होती है।

dayanand saraswati in hindi : 14 वर्ष की कोमलावस्था में ही वह सत्य की खोज के लिए प्रेरित हुए । एक बार स्वामीजी ने ‘ शिवरात्रि ‘ का व्रत रखा तथा रातभर शिवमंदिर में जागते रहे , लेकिन उनका मन शान्त न रहा । एक प्रश्न बार – बार उनके मस्तिष्क में घूमता रहा कि क्या पत्थर का पिण्ड ही महादेव अथवा ईश्वर है ? स्वामी दयानन्द के तर्कपूर्ण मन ने इसे स्वीकृति नहीं दी ।

महर्षि दयानन्द सरस्वती का स्वामी विरजानन्द से भेंट और आर्य समाज की स्थापना

महर्षि दयानन्द सरस्वती का स्वामी विरजानन्द से भेंट : फलतः महावीर स्वामी ( 599-527 ई . पू . ) तथा गौतम बुद्ध ( 567-487 ई . पू . ) के नक्शे कदम पर चलते हुए , स्वामी दयानन्द सरस्वती ने भी 1845 ई . में गृह – त्याग कर दिया । 16 वर्ष तक वह भारत भ्रमण करते रहे तथा 1861 में मथुरा पहुँचे , जहाँ इस महान् संन्यासी की भेंट स्वामी विरजानन्द से हुई , जिनसे उन्होंने वेदों की शिक्षा प्राप्त की । विरजानन्दजी की शिक्षा का ही परिणाम था कि स्वामी दयानन्द ने 1863 में धर्म के नाम पर प्रचलित पाखण्डो का खण्डन करने के लिए ‘ पाखण्ड खण्डिनी पताका ‘ लहराई ।

आर्य समाज ‘ की स्थापना : स्वामी दयानन्द चारों ओर घृणा एवं द्वेष के स्थान पर सत्य व प्रेम का मनोहारी वातावरण व्याप्त कर देना चाहते थे । इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने 1875 में बम्बई मेंआर्य समाज ‘ की स्थापना की । इतना ही नहीं , अपने विचारों को जन – जन तक पहुँचाने के लिए , उन्होंने भ्रमण का मार्ग कभी नहीं छोड़ा , लेकिन यह प्रक्रिया केवल 8 वर्षों तक की , क्योंकि मात्र 59 वर्ष की आयु में सन् 1883 में महर्षि दयानन्द सरस्वती ने इस संसार विदा ले ली ।

महर्षि दयानन्द सरस्वती का जीवन परिचय

नाममहर्षि दयानन्द सरस्वती
बचपन का नाम ‘ मूलशंकर
जन्म1824 ई
जन्म स्थानगुजरात की मोरवी रियासत में टंकारा नाम के छोटे से गाँव
मृत्यु1883 (59 वर्ष)
मृत्यु स्थानअजमेर, राजस्थान
पिताश्रीकृष्णलाल त्रिवेदी
गुरूस्वामी विरजानन्द
योगदान1875 में बम्बई में ‘ आर्य समाज ‘
ज्ञानसंस्कृत
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महर्षि दयानन्द सरस्वती के मुख्य सिद्धान्त,नियम और ग्रंथों के नाम

dayanand saraswati in hindi : दयानन्दजी ने अंधेरे में भटकी जनता को दिशा ज्ञान देने के लिए अनेक ग्रंथों की भी रचना की . उनमें मुख्य हैं-
( 1 ) सत्यार्थ प्रकाश तथा
( 2 ) ऋग्वेद व यजुर्वेद पर हिन्दी में भाष्य .

प्रारम्भ में स्वामी दयानन्द ने आर्य समाज के ‘ तीन ‘ सिद्धान्त निर्धारित किए-

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( 1 ) वेदों में शाश्वत सत्य है ,
( 2 ) आर्य समाज का प्रत्येक सदस्य अपनी आय का 1/100 भाग आर्य समाज स्कूल को अथवा आर्य समाज के समाचार ‘ आर्य प्रकाश ‘ को देगा तथा
( 3 ) आर्य समाज द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थाएँ केवल वेदों की शिक्षा प्रदान करेंगी ,

लेकिन सन् 1877 में स्वामीजी ने इन सिद्धान्तों के स्थान पर 10 नए नियम बनाए , जो इस प्रकार है-

( 1 ) सत्य का एकमात्र स्रोत ‘ वेद ‘ है , अतः वेदों का अध्ययन अनिवार्य है ,
( 2 ) वेदों में लिखित जीव का एक शरीर से दूसरे शरीर में जाना व कर्मवाद सही है ,
( 3 ) मूर्ति पूजा व्यर्थ है ,
( 4 ) तीर्थ यात्रा व अवतारवाद की धारणा नितान्त मिथ्या है , ( 5 ) सृष्टि में तीन तत्व सत्य हैं : ईश्वर , आत्मा व पुद्गल ,
( 6 ) ईश्वर एक है , वह सर्वशक्तिमान , निराकार , अनादि व अनन्त है ,
( 7 ) नारी शिक्षा का समर्थन करना चाहिए ,
( 8 ) बाल – विवाह , बहु – विवाह तथा अस्पृश्यता का विरोध करना चाहिए ,
( 9 ) विधवा विवाह को प्रोत्साहन देना चाहिए तथा
( 10 ) हिन्दी व संस्कृत भाषा के प्रचार के लिए प्रयास करना चाहिए ।

dayanand saraswati biography in hindi: इनके अलावा , सरस्वती के इस महान् पुजारी का सामान्य विचार यह था कि ” प्रत्येक व्यक्ति को अपनी उन्नति से संतुष्ट नहीं रहना चाहिए , वरन् सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए ।

स्वामी दयानन्द के स्वप्नों का भारत

dayanand saraswati biography in hindi : नवभारत के स्वप्नद्रष्टा के रूप में महर्षि दयानन्द ने एक शताब्दी पूर्व ही एक ऐसे भव्य भारत का चित्र खींचा था , जो लोकतांत्रिक होने के साथ – साथ समाज में फैली विभिन्न कुरीतियों से मुक्त हो स्वामीजी एक ऐसे भारत की स्थापना करना चाहते थे जहाँ प्रेम , सहयोग तथा बंधुत्व का साम्राज्य हो और जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपने गुणों के अनुरूप कार्य करने की स्वतंत्रता हो ।

swami dayanand saraswati quotes in hindi:  वह भारत की यश – पताका को विश्वभर में फहरा देना चाहते थे और भारत को इस रूप में देखना चाहते थे-
‘ विष्णु पुराण- 2/3 ‘ में कथित भारत उनकी परिकल्पना का भारत है “ गायन्ति देवाः किल गीतकानि । धन्यास्ते ते भारत भूमि भागे । स्वर्गापवर्गास्पदमार्गभूतेः भवन्ति भूयः पुरुषाः सुख्वात् ॥ ” प्रस्तुत किया ।

dayanand saraswati in hindi : कारण है कि उन्होंने जाति – पाँति के भेद का डटकर विरोध किया तथा भारतीय समाज पर स्वामी दयानन्द व्यक्ति – व्यक्ति के बीच खाई को सदैव के लिए भर देना चाहते थे । यही लगे इस कलंक को धो डालने के लिए ‘ अन्तर्जातीय विवाह ‘ का चौंका देने वाला आदर्श स्वामीजी चाहते थे कि भारत में हिन्दू धर्म का स्वरूप पूर्णतः परिमार्जित हो । यही कारण है कि उन्होंने ‘ शुद्धि आन्दोलन ‘ का सूत्रपात किया । इस आन्दोलन द्वारा जो हिन्दू अपना धर्म  त्यागकर ईसाई या मुसलमान बन गए थे , उन्हें शुद्ध करके हिन्दू धर्म में लाया गया ।

maharshi dayanand saraswati jayanti : उल्लेखनीय है कि लगभग 60,000 मलकाने राजपूतों को और उन हिन्दुओं को , जिन्हें मोपला विद्रोह के दौरान बलपूर्वक मुसलमान बना दिया गया था , हिन्दू धर्म में लौटने का अवसर मिला । दयानन्द सरस्वती का विश्वास था कि ‘ शिक्षा के प्रसार में ही भारत की खुशहाली निहित है . ‘ शैक्षणिक संस्थाओं के द्वार स्त्री – पुरुष , अमीर – गरीब सभी के लिए खुले रहने चाहिए ।


महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा नारीओं पर विशेष बल दिया गया


dayanand saraswati in hindi : आज की आवश्यकताओं के अनुरूप , उन्होंने नारी शिक्षा पर विशेष बल दिया । दयानन्दजी का मानना था कि बाल – विवाह , सती प्रथा , पर्दा प्रथा तथा दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों का शीघ्र समाधान ‘ स्त्री शिक्षा ‘ से ही सम्भव है । शिक्षा के प्रचार – प्रसार के लिए उन्होंने गुरुकुल , कन्या गुरुकुल तथा बड़ी संख्या में डी.ए.वी. स्कूल व कॉलेज खोले ।

dayanand saraswati jayanti : उल्लेखनीय है कि गुरुकुलों में संस्कृत , वेदों व आयुर्वेद की शिक्षा दी जाती थी । डी.ए.वी. स्कूल – कॉलेजों में आधुनिक सामाजिक विषयों तथा विज्ञान की शिक्षा दी जाती थी । इन शिक्षण संस्थाओं ने न केवल हिन्दू धर्म , समाज व संस्कृति की रक्षा की , अपितु शिक्षा व ज्ञान के क्षेत्र में भी अभिवृद्धि की ।

dayanand saraswati jayanti : स्वामी दयानन्द का विचार था कि समाज व राष्ट्र उन्नति में नारी अत्यधिक सहायक हो सकती है । उसी के हाथों में आने वाले कल की तस्वीर होती है । यह वह कलाकार है जो आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुन्दर रूप दे सकती है ।

swami dayanand saraswati quotes in hindi : इसी कारण दयानन्दजी ‘ सत्यार्थ प्रकाश ‘ में स्पष्ट कहा है कि
स्त्री पूज्या है . ‘ ‘ यत्रनार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ‘ ( मनुस्मृति ) ।

महर्षि दयानन्द सरस्वती का राजनीति जीवन पर योगदान

dayanand saraswati in hindi : महर्षिजी ने सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में शुद्धिकरण के अलावा राजनीति को भी परिष्कृत करने का प्रयास किया । उनका विश्वास था कि भारत के लिए ‘ लोकतंत्र ‘ अत्युत्तम व्यवस्था है । शासनाध्यक्ष का चुनाव जनता द्वारा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से होना चाहिए . वह जनता का प्रथम सेवक है । जनता की इच्छा के प्रतिकूल उसकी कोई इच्छा नहीं हो सकती ।

dayanand saraswati in hindi : राज्य के सभी कर्मचारी सत्यवादी , बुद्धिमान तथा निष्पक्ष न्यायकर्ता होने चाहिए । वर्तमान में स्वामी दयानन्द के विचारों की सार्थकता बोडो आज की विडम्बना यह है कि हम आदर्शों की दुहाई तो खूब देते हैं , लेकिन उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयास नहीं करते , हम सब जानते हैं कि प्रेम सहयोग , शान्ति एवं बन्धुत्व का मार्ग श्रेयस्कर है , लेकिन फिर भी आज समाज में हिंसा व आतंक का माहौल है ।

हम इतना गिर चुके हैं कि क्षुद्र स्वार्थों की पूर्ति के लिए देशद्रोह तक कर लैण्ड व खालिस्तान की समस्या मिल – बैठकर हल की जा सकती है , लेकिन नहीं- ‘ हमें अलग स्थान चाहिए ‘ यह बीमार मानसिकता का ही परिचायक है कि एकसाथ रहकर उन्नति नहीं हो सकती ।

dayanand saraswati in hindi : स्वामी दयानन्द ने हमें बताया कि अस्पृश्यता के रहते सभी प्रकार की उन्नति एक तरह से मिथ्या है , लेकिन हमारी आँखें आज भी नहीं खुली है । भागलपुर व बदायूँ आदि शहर साम्प्रदायिक उपद्रवों का नया इतिहास रच रहे हैं , लेकिन इसकी परवाह किसे है ? एक ओर हम आधुनिकता का दम्भ भरते हैं , वहीं दूसरी ओर हम सती प्रथा व दहेज प्रथा के पाश में जकड़े हुए हैं । 1961 में सरकार ने ‘ दहेज निवारक कानून बनाया था , लेकिन इसके बावजूद भी ‘ दहेज ‘ अमीरी का मापक यंत्र बना हुआ है।

dayanand saraswati in hindi : जहाँ तक नारी की स्थिति का सम्बन्ध है , वह आज सिर्फ मॉडल बनकर रह गई है । पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण के कारण , तन पर कपड़े सिमटते जा रहे हैं , फैशन परेड को नई हवा मिल रही है और नग्नता की प्रतिस्पर्द्धा बढ़ती जा रही है ।

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maharshi dayanand saraswati jayanti : महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती इस वर्ष शनिवार, 26 फ़रवरी स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती 2022 (भारत)को है।

जो आर्य समाज के संस्थापक और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अग्रणी व्यक्तियों में से एक दयानंद सरस्वती के जीवन और उपलब्धियों का जश्न मनाती है। यह दयानंद के जन्मदिन के अवसर पर मनाया जाता है,

जो पारंपरिक रूप से 10 दिसंबर को मनाया जाता है। दयानंद सरस्वती जयंती भारतीयों के लिए शिक्षा, सामाजिक सुधार और हिंदू धर्म के प्रचार के क्षेत्र में दयानंद और उनके आर्य समाज के योगदान को प्रतिबिंबित करने का एक अवसर है। यह भारतीय संदर्भ में शिक्षा और सामाजिक सुधार के महत्व को उजागर करने का अवसर भी प्रदान करता है।

उपसंहार

महर्षि दयानन्द सरस्वती : यह सत्य है कि आज आधुनिकता की दौड़ में हम स्वामी दयानन्द सरस्वती के विचारों को विस्मृत करते जा रहे हैं , लेकिन फिर भी वास्तविकता यह है कि उनके विचार आज भी हमार सच्चे साथी हैं । भले ही हम व्यवस्था में परिवर्तन कर लें , अलग राज्य बना लें और चाहे हथियारों का असीम भण्डार बना लें , वास्तविक प्रगति , शान्ति व बन्धुत्व से ही भ है ।

दयानन्दजी के ही विचारों का परिणाम था कि भारत की स्वतंत्रता यात्रा को नई गति मिली । वह प्रथम व्यक्ति थे जिन्होंने ‘ स्वदेशी ‘ शब्द का प्रयोग करके हमारे आत्म – सम्मान तथा देश – प्रेम में वृद्धि की । ‘ भारत भारतीयों के लिए है ‘ का नारा देकर उन्होंने हमारी क्षमताओं को बढ़ाया । इतना ही नहीं , ‘ सत्यार्थ प्रकाश ‘ में उन्होंने निर्भीकतापूर्वक लिखा है कि “ विदेशी राज्य चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो , स्वराज्य का स्थान नहीं ले सकता ।

dayanand saraswati in hindi : ” फ्रांस के महान् लेखक व चित्रकार ‘ रोमां रोला ‘ ( Romain Rolland ) ने महर्षि दयानन्द की प्रशंसा करते हुए ठीक ही लिखा है , ” दयानन्द सरस्वती इलियड अथवा गीता के प्रमुख नायक के समान थे । उनमें हरकुलिस की सी शक्ति थी । वस्तुतः शंकराचार्य ( 788-820 ई . ) के बाद इतनी महान् बुद्धि का का दूसरा सन्त नहीं जन्मा । ‘ “

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अज्ञानी होना गलत नहीं है;  अज्ञानी बने रहना एक त्रुटि है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती

प्रबुद्ध – यह एक घटना नहीं हो सकती।  यहां जो कुछ है वह अद्वैत है।  यह कैसे होगा?  यह स्पष्टता है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती

एक बच्चे की संस्कृति का सत्यापन ही बच्चे की मान्यता है।  आप दूसरों को बदलना चाहते हैं ताकि आप मुक्त हो सकें।  लेकिन, यह उस तरह से कभी काम नहीं करता है।  दूसरों को स्वीकार करें और आप स्वतंत्र हैं

महर्षि दयानन्द सरस्वती

दुनिया को सबसे अच्छा दें और सबसे अच्छा आपके पास वापस आ जाएगा एक व्यक्ति जो कम से कम खपत करता है और सबसे अधिक योगदान देता है

महर्षि दयानन्द सरस्वती

वह एक परिपक्व व्यक्ति है, क्योंकि झूठ देने में आत्म-विकास होता है।
सेवा का उच्चतम रूप किसी की मदद करना है  वह व्यक्ति जो बदले में धन्यवाद देने में असमर्थ है। 

महर्षि दयानन्द सरस्वती

एक मूल्य तब मूल्यवान होता है जब मूल्य का मूल्य स्वयं के लिए मूल्यवान होता है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती

लोग कहते हैं कि वे समझते हैं कि मैं क्या कहता हूं और मैं सरल हूं।  मैं सरल नहीं हूँ, मैं स्पष्ट हूँ।

महर्षि दयानन्द सरस्वती

नुकसान से निपटने में जो महत्वपूर्ण है वह है सबक खोना नहीं।  यह आपको सबसे गहन अर्थों में विजेता बनाता है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती

मनुष्य को दिया जाने वाला सबसे बड़ा वाद्य यंत्र आवाज है।

महर्षि दयानन्द सरस्वती

dayanand saraswati in hindi FAQ

महर्षि दयानन्द सरस्वती के ग्रंथों के नाम बताये!

( 1 ) सत्यार्थ प्रकाश तथा( 2 ) ऋग्वेद व यजुर्वेद पर हिन्दी में भाष्य .

महर्षि दयानन्द सरस्वती के पिता किसके उपासक थे?

शिव धर्म के

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